क्या एक सरकारी कर्मचारी को नौकरी के लिए निर्धारित डिग्री से अधिक उच्च योग्यता छिपाने के कारण सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तेलंगाना हाई कोर्ट के एक फैसले की जांच करने पर सहमति व्यक्त की, जिसने एक अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति की सेवा समाप्त करने के केंद्र के निर्णय को बरकरार रखा था। उसने ‘दसवीं पास’ मानदंड से अधिक ‘इंटरमीडिएट पास’ होने की जानकारी छिपाई थी, जो ‘कार्य सहायक’ की नौकरी के लिए आवश्यक थी।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा, अरविंद कुमार और श्री चंद्रशेखर की पीठ ने पवार सुभाष की याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया, जिसने हाई कोर्ट के 27 नवंबर, 2025 के आदेश को चुनौती दी है।
पीठ ने सुभाष के लिए उपस्थित वकील से कहा,”यह निर्णय प्रथम दृष्टया गलत है। हम इस निर्णय की जांच करेंगे। पहले से ही सुप्रीम कोर्ट का एक निर्णय है जो कहता है कि उच्च योग्यता अयोग्यता का आधार नहीं हो सकती।”
उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में उल्लेख किया था कि याचिकाकर्ता ने ‘कार्य सहायक’ के पद के लिए आवेदन किया था, जिसके लिए निर्धारित योग्यता ‘दसवीं पास’ थी और उसने यह जानकारी नहीं दी थी कि वह पहले से ही “इंटरमीडिएट पास” था।
इसने कहा कि सुभाष ने 2003 में 10वीं कक्षा पास की और 2006 में इंटरमीडिएट किया और 26 जुलाई, 2010 को इस पद के लिए आवेदन किया। हाई कोर्ट ने कहा कि सुभाष द्वारा किए गए घोषणा के आधार पर उसे नौकरी के लिए शार्टलिस्ट किया गया।
आवेदन के चरण में और बाद की सत्यापन प्रक्रिया के दौरान इसे “जानबूझकर जानकारी छिपाने” के रूप में मानते हुए केंद्र सरकार ने 27 मई, 2013 को उसकी सेवाएं समाप्त कर दीं।
सुभाष ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) के समक्ष बर्खास्तगी के आदेश को चुनौती दी, जिसने 27 मई, 2013 के आदेश को रद कर दिया और मामले को वापस भेजते हुए केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह उसे सार्वजनिक रोजगार में रखने के पहलू पर पुनर्विचार करे, जिसके लिए वह अन्यथा योग्य था और एक स्पष्ट आदेश पारित करे।
सरकार ने मामले पर पुनर्विचार करते हुए 30 अप्रैल, 2022 को एक स्पष्ट विस्तृत आदेश पारित किया कि याचिकाकर्ता सार्वजनिक रोजगार के लिए अनुपयुक्त है।
ड्रग्स बेचने वालों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि ड्रग्स बेचने वाले लोगों से बेहद सख्ती से निपटना होगा क्योंकि वे पीढ़ी दर पीढ़ी देश के युवाओं की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट, 1985 के तहत गिरफ्तार एक आरोपित की जमानत याचिका खारिज कर दी।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस शील नागू और जस्टिस वी. मोहना की पीठ एक आरोपित की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने मद्रास हाई कोर्ट के इस वर्ष फरवरी के आदेश को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने उसे जमानत देने से इन्कार करते हुए कहा था कि यह उसकी लगातार छठी जमानत अर्जी थी।
अभियोजन के मुताबिक 11 जून, 2022 को याचिकाकर्ता और दो अन्य लोग एक बैग लेकर खड़े थे। पुलिस को देखकर उन्होंने मौके से भागने की कोशिश की।
आरोप है कि बैग में करीब 10.15 ग्राम वजन की 21 एमडीएमए-एक्स्टेसी टैबलेट मिली थीं। अभियोजन ने बताया कि याचिकाकर्ता एवं एक अन्य आरोपित के कबूलनामे के आधार पर मौके से भागे तीसरे आरोपित को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।