विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए सरकार गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम ला सकती है।
इस स्कीम के तहत घरों में जमा सोने को बैंकों में जमा करने के लिए प्रेरित किया जाएगा और उसके बदले जमाकर्ता को ब्याज मिलेगा।
एक निश्चित अवधि के लिए सोने को जमा करना होगा। उस सोने को सरकार ज्वैलरी निर्यातक व घरेलू ज्वैलरी निर्माताओं को देगी। ऐसे में ज्वैलरी निर्यात के लिए सोने का आयात नहीं करना होगा जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
गत वित्त वर्ष 2025-26 में 72 अरब डॉलर मूल्य के सोने का आयात किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोगों से एक साल तक सोने की खरीदारी नहीं करने की अपील की थी।
प्रधानमंत्री की इस अपील पर सराफा कारोबारियों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ज्वैलरी निर्माण से लाखों कारीगरों का जीवनयापन जुड़ा है।
घरों में 30,000 टन से अधिक सोना विभिन्न रूप में उपलब्ध
एक अनुमान के मुताबिक, देश के घरों में 30,000 टन से अधिक सोना विभिन्न रूप में उपलब्ध है। घरों में जमा सोने को बाहर निकलवाने के लिए पिछले साल आरबीआइ ने गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम का प्रारूप जारी किया था। हालांकि इसे लागू नहीं किया जा सका।
सूत्रों का कहना है कि आरबीआई की इस स्कीम को संशोधन के साथ लागू किया जा सकता है। गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के लिए बैंक में अलग से खाता खोलना होगा। इस खाते में कम से कम 10 ग्राम सोना जमा करना होगा। किसी भी रूप के सोने को जमा किया जा सकेगा। कम से कम एक साल तो अधिक 16 साल तक के लिए सोने को जमा किया जा सकेगा।
अधिक अवधि पर सालना सोने के मूल्य का 2.5-3 प्रतिशत तक का ब्याज दिया जा सकता है। अवधि पूरा होने के बाद सोना जमाकर्ता को लौटा दिया जाएगा।
जानकारों का कहना है कि 2000 टन सोना भी गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के तहत जमा हो जाते हैं तो तीन साल तक सोने का आयात नहीं करना होगा। भारत में सालाना 700 टन से अधिक सोने का आयात किया जाता है।
हालांकि जानकारों का कहना है इस प्रकार की स्कीम को लागू करने पर सरकार को घाटे का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि सोने का कीमत लगातार बढ़ती रहती है। ऐसे में तीन साल पहले जमा 10 ग्राम सोने को तीन साल बाद लौटाने पर सरकार को अधिक मूल्य का भुगतान करना होगा।