सरकार ने बदले प्राइवेट एफएम रेडियो के प्रसारण नियम, स्थानीय भाषा के कार्यक्रमों पर रहेगा खास फोकस…

सरकार ने शुक्रवार को राज्यसभा को बताया गया कि प्राइवेट एफएम रेडियो स्टेशनों को यह सुनिश्चित करना होगा कि रोजाना के प्रसारण का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय भाषा में हों। इससे स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और लोक संगीत को बढ़ावा मिलेगा।

सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि प्राइवेट एफएम रेडियो नीति का मकसद स्थानीय कंटेंट को बढ़ावा देना है, जिसमें स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और लोक संगीत पर आधारित कार्यक्रम शामिल हैं।

इस नीति के तहत, हर प्रसारक को यह सुनिश्चित करना होता है कि उसके रोजाना के प्रसारण कंटेंट का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा शहर की स्थानीय भाषा में हो।

मंत्री ने बताया कि सरकार ने नौ-10 जुलाई, 2025 को पारदर्शी व्यवस्था के जरिये 234 नए शहरों में 730 एफएम चैनलों के लिए ई-नीलामी आयोजित की और नीलामी से पहले प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में इसका प्रचार-प्रसार किया गया था। इस दौर में 18 सफल बोली लगाने वाले थे। अभी 386 प्राइवेट एफएम रेडियो चैनल चल रहे हैं।

मुरुगन ने कहा कि प्राइवेट एफएम रेडियो चरण-तीन नीति के तहत प्रसारकों को प्रसार भारती के टावरों और साइटों का इस्तेमाल करने की भी इजाजत है ताकि सेवाओं को तेज़ी से शुरू किया जा सके।

मुरुगन ने यह भी कहा कि सरकार जन-सेवा से जुड़ी घोषणाओं और सरकारी योजनाओं की जानकारी के प्रसारण पर नजर रखने के लिए कई तरह के तरीकों का इस्तेमाल करती है।

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