दिल्ली सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राष्ट्रीय राजधानी के निजी स्कूलों में फीस को नियंत्रित करने वाला नया कानून शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में लागू नहीं होगा।
यह बात जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आलोक आराधे की पीठ के समक्ष कही गई, जो दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 के कार्यान्वयन से संबंधित याचिकाओं के एक समूह की सुनवाई कर रही थी।
मौजूदा शैक्षणिक वर्ष में लागू नहीं होगा कानून
दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने पीठ को बताया कि यह कानून मौजूदा शैक्षणिक वर्ष में लागू नहीं होगा।
पीठ ने सभी मुद्दों को दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष उठाने की छूट दी, जो 2025 अधिनियम और उसके बाद के नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें हाई कोर्ट के आठ जनवरी के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाएं भी शामिल थीं, जिसमें निजी स्कूलों को शुल्क विनियमन समितियां गठित करने का निर्देश देने वाली अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया था।
लेकिन ऐसी समितियों के गठन के लिए समय सीमा बढ़ा दी गई थी। सुनवाई के दौरान इस मामले में पेश हुए वकीलों में से एक ने कहा कि हाई कोर्ट को इस मुद्दे पर जल्द से जल्द फैसला करना चाहिए क्योंकि इसमें कई स्कूल और लाखों बच्चे शामिल हैं। हाई कोर्ट को इसकी जानकारी है।