बंगाल के सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में जीत की जिम्मेदारी मिली, अमित शाह के भरोसे पर खरे उतरते हुए बिप्लब देब ने खिलाया कमल…

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में भाजपा की जीत के कई चेहरे हैं। इन्हीं में से एक चेहरा हैं त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब देब, जो अमित शाह की टीम का हिस्सा थे।

सभी प्रभारियों के बीच बंटे राज्य के हिस्से में बिप्लब देब को पश्चिम बंगाल के सबसे कठिन इलाके में कमल खिलाने का जिम्मा दिया गया। या यूं कहें खुद देब की भी इच्छा थी कि उन्हें सबसे चुनौती वाला इलाका दिया जाए। उनके पास कोलकाता नॉर्थ, कोलकाता साउथ, कोलकाता उपनगरीय और 24 परगना दक्षिण था।

हावड़ा की भी कई सीटों पर किया काम

इन इलाकों की 49 सीटों में भाजपा के पास एक भी सीट नहीं थी। कोलकाता टीएमसी का गढ़ माना जाता है तो 24 परगना दक्षिण अभिषेक बनर्जी का इलाका। वैसे देब ने इन इलाके के हिस्सों के अलावा हावड़ा की कई सीटों पर भी काम किया।

अर्जुन सिंह सारीखे नेताओं को साधने में निभाई अहम भूमिका 

कोलकाता और दक्षिण परगना में सबसे बड़ी चुनौती संगठन को दुरुस्त करना थी। बीते नवंबर से देब ने राज्य की विधानसभा सीटों पर प्रवास शुरू कर दिया था। सबसे पहले उन्होंने नॉर्थ बंगाल के सभी जिलों में प्रवास कर कार्यकर्ताओं में जीत का जोश और उत्साह भरा। उसके बाद उन्होंने बर्धमान के इलाकों मे बैठकें कीं। फिर पूरी तरीके से दक्षिण बंगाल को साधने मे जुट गए।

करीब 150 विधानसभा सीटों पर प्रवास कर बैठकें कीं

संघ के साथ समन्वय के साथ-साथ स्थानीय संगठन का समन्वय बैठवाया। दक्षिण बंगाल के सभी सीटों पर प्रवास करके कार्यकर्ताओं में उत्साह भरा और टिकट के बाद उपजे असंतोष को कंट्रोल किया। चुनाव के दौरान उनका जोर पब्लिक भाषण के बजाय कार्यकर्ताओं संग बैठक कर उनका उत्साह बढ़ाना रहा।

उन्हें स्पष्ट हो गया था कि कार्यकर्ता सक्रिय हो गया है, डोर टू डोर उम्मीदवार का चुनाव प्रचार सभी घरों मे पहुंच गया और चुनाव के दिन सभी बूथ पर पोलिंग एजेंट बैठ जाएं तो पार्टी को चुनाव जीतने से कोई रोक नहीं सकता। क्योंकि पार्टी को इस बात का आभास हो चुका था कि ममता के प्रति जनता में नाराजगी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जनता का भरोसा है।

देर रात तक करते थे काम

देर रात तक बिप्लाब खुद से अपने क्षेत्र के उम्मीदवारों से बातचीत करते थे और उनकी समस्या का समाधान कराते थे। वह ऐसे नेता हैं जिन्होंने बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं संग अपनी विधानसभा सीटों पर बैठकें की। उनके ऊर्जावान भाषण कार्यकर्ताओं मे जोश भरने मे मददगार रहे। कोलकाता और दक्षिण परगना मे पीएम मोदी के हुए कार्यक्रमों को लेकर वे बेहद सहज रहे।

संगठन के अलावा उन्होंने पार्टी के हरियाणा, यूपी और दिल्ली के कार्यकर्ताओं की अपनी एक मजबूत टीम चुनावी कार्य में सहयोग के लिए प्रमुख सीटों पर लगाया। उनसे सीधा फीडबैक लेकर वे पार्टी नेतृत्व को जमीनी हकीकत से रोजाना अवगत कराते रहते थे।

डोर टू डोर पर फोकस

देब का फोकस सबसे ज्यादा डोर टू डोर पर रहा। उम्मीदवारों के अलावा उन्होंने शक्ति केंद्र वार जिसमें चार से पांच बूथ आते हैं… कार्यकर्ताओं की फौज लगाकर जनता से पीएम मोदी के नाम पर उम्मीदवार के लिए वोट की अपील कराई। इस डोर टू डोर प्रचार के गतिविधि की रिपोर्ट वे रोजाना लेते थे।

इसके लिए उन्होंने चार शक्ति केंद्र पर इंचार्ज के रूप मे एक-एक वरिष्ठ कार्यकर्ता को लगया था, जिनसे वह खुद या उनकी टीम से जुड़े लोग रोजाना पब्लिक के मूड तक की रिपोर्ट लेते थे। इस क्रम मे बिप्लाब देब ने करीब 35 विधानसभा के शक्ति केंद्र इंचार्जों से स्वयं कई बार बातचीत कर उनका उत्साह बढ़ाया।

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