Good News: झारखंड में बनेंगे 3 लाख नए ग्रीन राशन कार्ड, काम पहले आओ पहले पाओ के आधार पर होगा…

वैकेंसी न होने की वजह से लोग ग्रीन राशन कार्ड के लिए आवेदन तो कर रहे थे, लेकिन कार्ड बन नहीं रहा था। जिले में करीब 43 हजार अयोग्य लाभुकों के नाम काटे गए, जिसके बाद पेंडिंग ग्रीन राशन कार्ड के आवेदनों को स्वीकृत कर दिया गया है।

अब जिले में मात्र तीन हजार के आसपास आवेदन ही पेंडिंग हैं। उधर, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत निर्मित राशन कार्ड में नाम जोड़ने के लिए भी बड़ी संख्या में आवेदन पेंडिंग थे।

वैकेंसी होने के बाद बड़ी संख्या में नाम भी जोड़े गए हैं। हालांकि, अब कोटा भर चुका है। ऐसे में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत कार्ड निर्माण के लिए अब भी आवेदन नहीं हो रहा है।

मेडिकल ग्राउंड पर कार्ड बनना हुआ आसान

राशन कार्ड होने पर ही आयुष्मान कार्ड बनता है। ऐसे में गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को राशन कार्ड बनवाने में काफी समस्या का सामना करना पड़ता था।

बीमारी से संबंधित कागजात अपलोड करने पर राज्य से उसकी स्वीकृति मिलती थी, इसमें काफी समय लग जाता था, लेकिन अब व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है।

जिला आपूर्ति पदाधिकारियों को ऐसी स्थिति में राशन कार्ड बनाने का अधिकार देने की बात चल रही है। जल्द ही इसके लिए सॉफ्टवेयर में बदलाव किया जा सकता है।

अनाज का नहीं मिलेगा एक्सटेंशन

हाल के दिनों में आपूर्ति विभाग की योजनाओं में कई बदलाव किए गए हैं। केंद्र सरकार की योजना के तहत अनाज का वितरण स्मार्ट पीडीएस के माध्यम से किया जा रहा है। इससे रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है।

दूसरी ओर केंद्र सरकार ने अब अनाज का एक्सटेंशन देने से इन्कार कर दिया है। सभी जिलों को पत्र भेजकर कहा है कि जिस माह का अनाज है उसी माह में उसका वितरण हर हाल में कर देना है।

राज्य सरकार अगर एक्सटेंशन देती है तो उसकी भरपाई भी उसे ही करनी होगी।

ऐसे में अब लाभुकों को भी हर हाल में हर माह अपने अनाज का उठाव कर लेना होगा। दूसरी ओर जन वितरण प्रणाली दुकानदार को निलंबित करने पर अब उसकी मशीन उस डीलर को सौंप देनी होगी, जिससे लाभुकों को टैग किया गया है।

नए दुकानदार को उसी मशीन में अपनी लॉगिन कर संबंधित लाभुकों को अनाज देना होगा। इससे कमीशन के साथ-साथ स्टॉक के हिसाब-किताब में आसानी होगी।

राज्य सरकार ने तीन लाख नए ग्रीन कार्ड की स्वीकृति दी है। ऐसे में पहले से आवेदन करने वालों का ग्रीन कार्ड तो बन ही जाएगा। नए लोग भी आवेदन कर सकेंगे।

करीब 43 हजार अयोग्य लाभुकों के नाम काटे गए हैं। उनकी जगह पर आवेदन करने वालों का नाम जुड़ा है। अब काफी कम आवेदन लंबित हैं।

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