भारतीय बैंकिंग सेक्टर में फिलहाल बहुत कुछ अच्छा चल रहा है। मुनाफा लगातार बढ़ रहा है। फंसे कर्जे यानी एनपीए रिकॉर्ड न्यूनतम स्तर पर है।
वित्त मंत्रालय ने इस आधार पर मंगलवार (5 मई) को भारतीय बैंकिंग उद्योग के मौजूदा दौर को पिछले कई दशकों का सबसे “शानदार” दौर करार दिया लेकिन इसी दिन विश्वविख्यात कंसल्टेंसी फर्म मैकेंजी एंड कंपनी ने साफ चेतावनी दी है कि अब मुनाफा बढ़ाना और मार्जिन बनाए रखना भारतीय बैंकिंग के लिए मुश्किल होता जा रहा है।
दोनों रिपोर्टों के बीच का यह विरोधाभास भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य को लेकर भी कुछ गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।
वित्त मंत्रालय की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का गैर-खाद्य ऋण वृद्धि दर 15.9 फीसद रही, जो पिछले साल के 10.9 फीसद से 497 आधार अंक की भारी बढ़ोतरी है। कुल ऋण बकाया मार्च 2026 तक 212.9 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल से 29.2 लाख करोड़ रुपये अधिक है।
कृषि और संबद्ध क्षेत्र में ऋण वृद्धि 15.7 फीसद (पिछले साल 10.4), उद्योग क्षेत्र में 15 फीसद (पिछले साल 8.2), सेवा क्षेत्र में 19 फीसद (पिछले साल 12) और व्यक्तिगत ऋणों में 16.2 फीसद (पिछले साल 11.7) की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
आर्थिक गतिविधियों की मजबूती और निजी निवेश में उछाल का नतीजा- मंत्रालय
मंत्रालय ने इसे “आर्थिक गतिविधियों की मजबूती और निजी निवेश में उछाल” का नतीजा बताया है और कहा है कि कम ब्याज दर वातावरण, सरकारी पूंजीगत खर्चे में वृद्धि और संरचनात्मक सुधारों ने निजी निवेश को बढ़ावा दिया है।
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बन गई है और बैंकिंग सेक्टर “ऐतिहासिक रूप से न्यूनतम फंसे कर्जे और पर्याप्त पूंजी” के साथ अर्थव्यवस्था का इंजन बनकर उभरा है।
बैंकिंग सेक्टर को लेकर मैकेंजी की चेतावनी
लेकिन मैकेंजी की रिपोर्ट ने तस्वीर का दूसरा और अंधेरा पहलू उजागर किया है। इसकी रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकिंग सेक्टर अब उस मोड़ पर पहुंच चुका है जहां से आगे नीचे जाने का खतरा है। पिछले वित्त वर्ष के दौरान परिसंपत्तियों पर रिटर्न (आरओए) के 1.4 फीसद के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बावजूद, नेट इंटरेस्ट मार्जिन (निम) 3.3 फीसद से घटकर 3.1 फीसद रह गया है।
ऋण-जमा अनुपात दशक के उच्चतम स्तर 80 फीसद पर पहुंच गया है, जिससे बैंक महंगे टर्म डिपॉजिट की ओर मजबूर हो रहे हैं। यानी बैंकों को जमा जुटाने के लिए ज्यादा ब्याज देना पड़ रहा है। मैकेंजी का यह भी कहना है कि असुरक्षित रिटेल लोन में स्लिपेज यानी कर्ज अदाएगी में गड़बड़ी बढ़ रहे हैं।
व्यक्तिगत ऋणों में एनपीए 0.9 फीसद से बढ़कर 1.6 फीसद और क्रेडिट कार्ड एनपीए 2.2 से 3.3 फीसद हो गया है। ऑपरेटिंग खर्च तेजी से बढ़ रहा है, खासकर प्राइवेट बैंकों में, लेकिन आय में उतनी वृद्धि नहीं हो रही।
रिपोर्ट में कहा गया है कि रेगुलेटरी बदलाव, ग्राहक व्यवहार और तेज टेक्नोलॉजी को अपनाने के बीच संतुलन बनाना अब चुनौती है। मैकेंजी ने पांच आयामों वित्तीय प्रदर्शन, उद्योग स्वास्थ्य, ग्राहक अनुभव, सामाजिक प्रभाव और परिचालन लचीलापन पर बैंकिंग सेक्टर का मूल्यांकन किया है।
रिपोर्ट साफ चेतावनी देती है कि बैंकों को अब केवल मुनाफे पर नहीं, बल्कि जोखिम प्रबंधन, लागत अनुशासन, साइबर सुरक्षा और दीर्घकालिक स्थिरता पर ध्यान देना होगा। जाहिर है कि रिपोर्ट बैंकिंग के मौजूदा “सुनहरा दौर” के कल “चुनौतीपूर्ण दौर” में बदलने को लेकर सचेत कर रहा है।