गुलाम जम्मू-कश्मीर में बढ़ा विद्रोह, पाकिस्तान में मुनीर की ताकत बढ़ी; नेशनल असेंबली ने लगाई मुहर…

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने गुरुवार को सेना और परमाणु कमान ढांचे से संबंधित दो विधेयक पारित किए।

इनका मकसद पिछले साल हुए 27वें संविधान संशोधन के बाद सेना के पदानुक्रम में बदलाव को सुव्यवस्थित करना है।

इस संशोधन के जरिये “ज्वाइंट चीफ आफ स्टाफ कमेटी” के अध्यक्ष का पद खत्म करके “चीफ आफ डिफेंस फोर्सेज” (सीडीएफ) का पद बनाया गया है। सीडीएफ का पद अभी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के पास है।

नए प्रविधानों के तहत मुनीर को व्यापक अधिकार दे दिए गए हैं। प्रस्तावित कानून से रक्षा बल मुख्यालय की स्थापना का रास्ता साफ होगा, जो सशस्त्र बलों के मुख्यालय के तौर पर काम करेगा। यह मुख्यालय सीडीएफ की कमान में होगा।

सीडीएफ राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा और सशस्त्र बलों से जुड़े सभी मामलों पर प्रधानमंत्री के “मुख्य सैन्य सलाहकार” होंगे। सीडीएफ के पास सशस्त्र बलों का परिचालन कमान और नियंत्रण होगा। वह कमान और नियंत्रण से जुड़े मामलों में संघीय सरकार के प्रति जिम्मेदार होंगे।

सीडीएफ के पास सशस्त्र बल कानून के दायरे में आने वाले लोगों को सेवानिवृत्त करने, इस्तीफा स्वीकार या अस्वीकार करने, सेवा से हटाने या सेवा में बनाए रखने, रिटायरमेंट की उम्र या सेवानिवृत्ति की समय-सीमा में छूट देने का अधिकार होगा।

इस संशोधन के तहत “कमांडर आफ द नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड” (सीएनएससी) का पद भी बनाया गया है। पिछले महीने जनरल सैयद आमिर रजा को लेफ्टिनेंट जनरल के पद से पदोन्नत कर पहला सीएनएससी नियुक्त किया गया था। नेशनल असेंबली की मुहर ऐसे समय पर लगी जब पीओके में पाक सरकार के खिलाफ विद्रोह बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने नेशनल असेंबली में पाकिस्तान रक्षा बल अधिनियम, 2026 और संशोधित राष्ट्रीय कमान प्राधिकरण अधिनियम, 2010 विधेयक पेश किए। निचले सदन की मंजूरी के बाद अब इन्हें सीनेट में पेश किया जाएगा।

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