गौरेला पेण्ड्रा मरवाही : दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना :मुख्यमंत्री ने जीपीएम जिले के 4262 हितग्राहियों के खाते में हस्तांतरित किए 4.26 करोड़ रुपये की राशि…

जिला स्तरीय राशि वितरण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शामिल हुए हितग्राही और जनप्रतिनिधि

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत बलौदाबाजार के पंडित चक्रपाणि शुक्ल हायर सेकेंडरी स्कूल मैदान में आयोजित प्रदेश स्तरीय आदान राशि वितरण कार्यक्रम में रिमोट का बटन दबाकर राज्य के 4 लाख 95 हजार 965 हितग्राहियों के खाते में 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये हस्तांतरित किए।

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रिमोट का बटन दबाते ही जीपीएम जिले के 4262 हितग्राहियों के खाते में 10 हजार रुपये के मान से 4 करोड़ 26 लाख 20 हजार रुपये की राशि अंतरित हुई। इनमें ग्रामीण क्षेत्र के 2862 और नगरीय निकाय क्षेत्र के 1400 हितग्राही शामिल हैं।

कार्यक्रम में सांकेतिक रुप से 11 हितग्राहियों को उनके खाते में राशि हस्तांतरण का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ महतारी की छायाचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर किया गया। 

          कलेक्ट्रेट के अरपा सभा कक्ष में आयोजित जिला स्तरीय आदान राशि वितरण कार्यक्रम की मुख्य अतिथी जिला पंचायत अध्यक्ष सुश्री समीरा पैकरा थीं।

कार्यक्रम में कलेक्टर श्रीमती लीना कमलेश मंडावी, जिला पंचायत सीईओ श्री मुकेश रावटे, जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद गौरेला श्री मुकेश दुबे, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद पेण्ड्रा श्री राकेश जालान, जिला पंचायत सदस्य श्री पवन पैकरा, गणमान्य नागरिक श्री बृजलाल सिंह राठौर, संयुक्त कलेक्टर श्री दिलेराम डाहिरे, एसडीएम पेण्ड्रारोड श्री विक्रांत अंचल, सभी तहसीलदार एवं सीएमओ सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या मंे हितग्राही उपस्थित थे। जिला स्तरीय कार्यक्रमों में उपस्थित सभी लोगों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की लाइव प्रसारण का अनुश्रवण किया।

       दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य के भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को आर्थिक रूप से संबल बनाने के लिए शुरू की गई एक प्रमुख योजना है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के भूमिहीन कृषि श्रमिकों को सशक्त बनाना है।

भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रूपए की वित्तीय सहायता सीधे हितग्राही के बैंक खाते में दी जाती है। इस योजना में भूमिहीन कृषि मजदूरों के साथ वनोपज संग्राहक भूमिहीन परिवार, चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी आदि पौनी-पसारी व्यवस्था से संबद्ध भूमिहीन परिवार भी शामिल हैं।

इनके अलावा अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों के देवस्थल में पूजा करने वाले पुजारी, बैगा, गुनिया, माँझी परिवारों को भी शामिल किया गया है। 

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