गंगा व रामगंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि होने से गंगापार में दोनों नदियों के तटवर्ती गांवों तक पानी पहुंच गया है। गांवों और खेतों में पानी भरने से पशुओं को भारी समस्या हो गई है।
आदमी तो छतों और सड़क किनारे पॉलीथीन तान कर रह रहे हैं, लेकिन पशुओं को कोई सहारा नहीं मिल रहा है। कीमती जानवरों को तो ग्रामीणों ने सड़क किनारे बांधने की व्यवस्था की है, लेकिन गायों आदि को कई ग्रामीणों ने खुला छोड़ दिया है। ऐसे में वह चारे की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं। पशुओं के चारे के लिए ग्रामीणों को काफी दूर चलकर सूखे खेतों से चारा लाना पड़ रहा है।
गंगा की बाढ़ का पानी अंबरपुर, अंबरपुर की मड़ैया, चित्रकूट, कलक्टरगंज, आशा की मड़ैया, रामपुर, जोगराजपुर, मंझा की मड़ैया, तीसराम की मड़ैया, गांधी व कुइयां गांव के कई घरों में भर गया है। जिससे ग्रामीण मकान की छत व सड़क किनारे पालीथीन के नीचे परिवार के साथ गुजर कर रहे हैं।
खेतों में डेढ़ महीने से अधिक समय से बाढ़ का पानी भरा होने से धान, मक्का, बाजरा, मक्का व चारा खराब हो गया है। बड़ी संख्या में मवेशी सड़कों पर भूखे घूम रहे हैं। मवेशी सड़क किनारे खड़ी पतेल व पेड़ के पत्तों को खाकर अपनी भूख मिटा रहे हैं।
आसमपुर के प्रधान रमाकांत वर्मा बताते हैं कि गांव में बाढ़ का पानी भरा है। जिससे मवेशियों को बांधने की जगह नहीं है और चारे की समस्या है। जिससे अधिकांश ग्रामीणों ने मवेशी रिश्तेदारी में भेज दिए हैं।
कुसमापुर के गुड्डू कहते हैं कि मवेशियों के लिए रामगंगा की कटरी से घास लेने जाते थे, लेकिन अब रामगंगा की बाढ़ का पानी खेतों में भर गया है। जिससे चारे की समस्या और बढ़ गई है। अंबरपुर के राजू कहते हैं कि अब चारों ओर पानी ही पानी है। जिससे मवेशियों सूखा भूसा खिला रहे हैं।
रामगंगा की बाढ़ का पानी भावन गुलरिया, गैलार, नीचे वाला चपरा आदि गांवों में भर गया है। अमैयापुर पुलिया पर बाढ़ का पानी बहने लगा है। लोग पानी में निकलकर आवाजाही कर रहे हैं। यदि रामगंगा के जलस्तर में और वृद्धि हुई तो पुलिया पर आवागमन बाधित हो जाएगा।
चित्रकूट डिप पर तीन फीट बाढ़ का पानी तेज धार से बहने से पुलिस ने बल्लियां लगाकर बदायूं मार्ग पर आवागमन बंद कर दिया है। जिससे लोग राजेपुर से डबरी होकर जिला मुख्यालय पहुंच रहे हैं। एसडीएम श्वेता साहू ने बताया कि गंगा और रामगंगा का जलस्तर बढ़ने से लेखपालों को सतर्क कर दिया गया है और बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। जिससे तत्काल पीड़ितों की मदद की जा सके। गांवों में आवागमन के लिए नाव व मोटरवोट चल रहे हैं।