प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131
हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है।
ब्रह्म पुराण व वाराह पुराण के अनुसार, ज्येष्ठ मास के दशमी तिथि को हस्त नक्षत्र में गर करण, वृष के सूर्य व कन्या के चन्द्रमा में गंगा धरती पर अवतीर्ण हुई थी।
सप्तमी को स्वर्ग से आने के बाद तेज वेग को थामने के लिए भगवान शिव ने अपनी जटाओं में मां गंगा को धारण किया, जिसके बाद ज्येष्ठ महीने की दशमी को जटाओं से पृथ्वी पर अवतरित किया था। इस मुहूर्त में स्नान, दान व मंत्र जाप का पूर्ण शुभ फल प्राप्त होता है।
स्नान-दान का शुभ मुहूर्त: ज्योतिर्विद पंडित केसी पाण्डेय के अनुसार, दशहरा स्नान का प्रारम्भ 5 जून गुरुवार को (भोर) में 3 बजकर 35 मिनट पर हस्त नक्षत्र, सर्वार्थसिद्धि योग तथा सिद्धि योग में होगा।
दशमी तिथि 4 जून की देर रात्रि 11.54 से 5 जून की देर रात्रि 2.16 तक रहेगी। अतः श्रद्धालु 5 जून को पूरे दिन स्नान-दान कर पुण्य प्राप्त कर सकेंगे।
इस बाऱ 5 जून गुरुवार को भोर 3.35 से सुबह 5.24 तक तथा पुनः सुबह 9.13 तक गंगा स्नान विशेष शुभफल दायी रहेगा।
मंत्र: पूजा के समय ॐ नमः शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै नमो नमः मंत्र का जप करते रहना चाहिए।
उपाय
- गंगा स्नान के बाद गंगा तट पर श्रद्धापूर्वक चौपाई गंग सकल मुद मंगल मूला, सब सुख करनि हरनि सब सुला का अधिक से अधिक जाप करने से भी इच्छापूर्ति होती है।
- भविष्य पुराण के अनुसार, गंगा दशहरा के शुभ मुहूर्त में गंगाजल में स्थित होकर गंगा स्तोत्रम् का दस बार पाठ तथा मां गंगा का पूजन करने वाला व्यक्ति पापों से मुक्त होकर समस्त इच्छाओं की पूर्ति प्राप्त कर लेता है।
पूजा समग्री: मान्यता है की गंगा दशहरा के दिन मां गंगा के पूजन में समस्त सामग्री दस की संख्या में चढ़ाना चाहिए। जैसे 10 पुष्प,10 पान, 10 लौंग, 10 इलायची, 10 फल, 10 मिष्ठान, 10 दीपक आदि साथ ही 10 ब्राह्मणों को यथा शक्ति दान अवश्य देना चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।