ईरान की सत्ता का केंद्रीय स्तंभ अब लगभग ध्वस्त हो चुका है। अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों ने महज कुछ हफ्तों में देश के सबसे ऊंचे पदों पर बैठे नेताओं को एक-एक करके मार गिराया है।
सुप्रीम लीडर अली खामेनेई से लेकर उनके करीबी सलाहकार और सेना के कमांडर तक, कोई भी सुरक्षित नहीं बच पाया। यह हमले ईरान की रक्षा व्यवस्था, खुफिया तंत्र और राजनीतिक कमान को बुरी तरह कमजोर कर चुके हैं।
हालांकि, ईरान अब भी अमेरिका और इजरायल के सामने मजबूती से लड़ रहा है। ईरान अब जंग नहीं बल्कि अपना अस्तित्व बचाने की जद्दोजहद में लगा है।
सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत से शुरू हुआ सिलसिला
28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल के शुरुआती हवाई हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई मारे गए। 86 साल के खामेनेई ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक के सबसे ताकतवर चेहरे थे। उन्होंने 1989 से देश की कमान संभाली थी और अमेरिका-इजरायल के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था।
उनके आवास और नेतृत्व परिसर पर हुए सटीक हमले में खामेनेई के साथ कई परिवार के सदस्य भी मारे गए। इसी हमले में उनके करीबी सुरक्षा सलाहकार अली शमखानी भी मारे गए।
शमखानी ईरान की सुरक्षा और परमाणु नीति के प्रमुख चेहरे थे। इस हमले ने पूरे देश को सदमे में डाल दिया और 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई।
कई कमांडर भी मारे गए
खामेनेई की मौत के बाद ईरान की रक्षा व्यवस्था को और बड़े झटके लगे। हमलों में आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ मोहम्मद पाकपुर, डिफेंस मिनिस्टर अजीज नसीरजादेह और नेशनल डिफेंस काउंसिल के प्रमुख अली शमखानी की भी मौत हो गई।
इनमें से कई एक ही बैठक के दौरान मारे गए, जिससे ईरान की सैन्य कमान बुरी तरह प्रभावित हुई। इन हमलों ने ईरान की मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों को भी निशाना बनाया।
खुफिया प्रमुख सलाह असादी और एडवांस्ड वेपन्स प्रोग्राम के हेड हसन जबाल अमेलियन भी मारे गए। इससे ईरान की सैन्य क्षमता और गोपनीय जानकारी दोनों पर गहरा असर पड़ा।
लारिजानी की हत्या ने युद्ध की दिशा बदल दी
फिर 17 मार्च 2026 को ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख अली लारिजानी भी हमलों में मारे गए। ये हमला इजरायल की ओर से था। खामेनेई की मौत के बाद लारिजानी ही ईरान में सैन्य सत्ता को चला रहे थे। इस हमले में उनके बेटे और एक डिप्टी भी मारे गए।
लारिजानी खामेनेई के सबसे करीबी सलाहकारों में शुमार थे। हालांकि वे धार्मिक रूप से हाई रैंक के मौलवी नहीं थे, इसलिए सुप्रीम लीडर नहीं बन सके, लेकिन युद्ध के दौरान उन्होंने पूरी सत्ता संभाल रखी थी। उनकी मौत को ईरान के नेतृत्व पर अब तक का सबसे गहरा प्रहार माना जा रहा है।
बसिज फोर्स कमांडर और अन्य प्रमुख चेहरे भी खत्म
इसी हमले में बसिज पैरामिलिट्री फोर्स के कमांडर घोलामरेजा सोलैमानी भी मारे गए। बसिज ईरान की आंतरिक सुरक्षा और प्रदर्शनों को कुचलने में अहम भूमिका निभाती है। सोलैमानी के अलावा मिलिट्री ब्यूरो के प्रमुख मोहम्मद शिराजी और आर्म्ड फोर्सेस के चीफ ऑफ स्टाफ सय्यद अब्दोलरहीम मुसावी जैसे नाम भी इस सूची में शामिल हैं।
इन हमलों में इंटेलिजेंस चीफ सलाह असादी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौत ने ईरान की खुफिया और सैन्य संरचना को और कमजोर कर दिया। कई जगहों पर एक साथ सटीक हमले किए गए, जिससे बचना मुश्किल हो गया।
नया सुप्रीम लीडर और मौजूदा हालात
अली खामेनी की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनी को नया सुप्रीम लीडर बनाया गया। मोजतबा 56 साल के हैं और पहले से ही पर्दे के पीछे सक्रिय थे, लेकिन अब उन्हें खुलकर कमान संभालनी पड़ रही है।
राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन जैसे कुछ नेता अभी बचे हैं, लेकिन पूरी लीडरशिप पर लगातार हमले हो रहे हैं। ईरान अब बदले की तैयारी में है और मिसाइल-ड्रोन हमलों से जवाब दे रहा है, लेकिन नेतृत्व की भारी क्षति से उसकी रणनीति और क्षमता दोनों प्रभावित हो चुकी हैं।