फ्रांस के राष्ट्रपति ने गुरुवार को कहा कि फ्रांस सऊदी अरब में सैनिक और अन्य सैन्य संसाधन भेजेगा। इसका मकसद लाल सागर के किनारे मौजूद उन अहम ऊर्जा केंद्रों की सुरक्षा करना है, जिन पर ईरान-समर्थित हूती ने हमले किए हैं।
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रां ने कहा कि दोनों देशों के बीच गुरुवार को हुए समझौते के तहत फ्रांस यानबू में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित करने के लिए सैनिक, रडार और डिफेंस सिस्टम भेजेगा।
इसका मकसद किसी संघर्ष में शामिल होना नहीं, बल्कि इस साइट की सुरक्षा करना है। उन्होंने इस संभावना से इनकार नहीं किया कि हालात बदलने पर और सैन्य मदद दी जा सकती है।
मैक्रां ने इस कदम को उन कोशिशों का हिस्सा बताया, जो फ्रांस ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और देश में गैस की कीमतें कम करने के लिए कर रहा है।
यह सब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के साथ छह महीने से अधिक समय पहले शुरू किए गए युद्ध के बीच हो रहा है। उस संघर्ष के कारण तेल और गैस के लिए अहम होर्मुज जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी जैसी स्थिति बन गई है।