एक तरफ पूरा यूरोप तपती गर्मी की मार झेल रहा है। सड़के पिघल रहीं, रेल सेवा ठप है। इंसानों से लेकर जानवरों पर इसका असर पड़ रहा है।
वहीं दूसरी तरफ एक अलग ही लड़ाई चल रही है। दरअसल पेरिस की डिप्टी मेयर ने फ्रांस की जानलेवा गर्मी के लिए अमेरिकी लोगों को जिम्मेदार ठहराया है।
अमेरिका जिम्मेदार: पेरिस की डिप्टी मेयर
पेरिस की डिप्टी मेयर ऑड्रे पुलवार ने अमेरिकियों और एयर कंडीशनिंग के लिए उनके जुनून को जिम्मेदार ठहराया है। इस हफ्ते फ्रांस में 43 डिग्री सेल्सियस तापमान के बावजूद वहां एयर कंडीशनिंग की कमी पर अमेरिकी मीडिया में काफी मजाक उड़ाया गया।
इसकेजवाब में पुलवार ने कहा कि अमेरिका ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में दुनिया में सबसे आगे है और जिसने दशकों तक वातावरण को ‘कार्बन बुफे’ की तरह इस्तेमाल किया है, वह ग्लोबल वार्मिंग के लिए काफी हद तक जिम्मेदार है। अमेरिका की वजह से ही फ्रांस में 1,300 से लोगों की मौतें हुईं हैं।
क्या बोलीं ऑड्रे पुलवार?
पुलवार ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘प्रिय अमेरिकी पत्रकारों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स आप में से कुछ लोग कई दिनों से पेरिस का मजाक उड़ा रहे हैं क्योंकि यहां हर कमरे में A/C नहीं है। हे भगवान यह तो हद है! आपके शहर, जो 90 प्रतिशत एयर-कंडीशंड हैं, इस स्थिति से अछूते नहीं हैं। इसलिए प्लीज, अब बहुत हुआ ज्ञान देना। आप अपना काम करना शुरू करें।’
अमेरिकी मीडिया का तंज
इस बयान पर वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिका का बचाव करते हुए पुलवार पर तंज कसा, ‘पेरिस के नेताओं को शायद एयर कंडीशनिंग से सांस्कृतिक ऐतराज हो, लेकिन जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, यूरोप के वोटर जल्द ही यह तय कर सकते हैं कि ‘ग्रीन’ होने के दिखावे से बेहतर है ठंडक पाना।’
लेकिन जहां फ्रांस और पश्चिमी यूरोप का ज्यादातर हिस्सा कार के डैशबोर्ड पर रखे चीज (cheese) की तरह पिघल रहा है, वहीं अमेरिका खुद 4 जुलाई का जश्न मनाने की तैयारी कर रहा है। वे ऐसे माहौल में रिकॉर्ड-तोड़ आतिशबाजी करने वाले हैं जो पहले से ही एक कन्वेक्शन ओवन जैसा गर्म हो रहा है।
अमेरिका में आने वाला है हीटवेव
अमेरिका खुद पहले भी ऐसी स्थिति देख चुका है शिकागो में 1995 की हीटवेव में 700 से ज्यादा लोगों की जान गई थी और 2021 में पैसिफिक नॉर्थवेस्ट में आए हीट डोम ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली थी।
पिछले जुलाई में, वाशिंगटन डीसी के पास रीगन नेशनल एयरपोर्ट पर तापमान 104°F (40°C) तक पहुंच गया था, जो दशकों पहले बने रिकॉर्ड के बराबर था; इस वीकेंड उस रिकॉर्ड के टूटने की उम्मीद है, जिससे वर्ल्ड कप फुटबॉल मैच भी खतरे में पड़ सकते हैं।