अमेरिका-ईरान विवाद पर पूर्व सेना प्रमुख नरवणे का बयान, बोले- पाकिस्तान कोई मध्यस्थ नहीं, सिर्फ ‘कूरियर सर्विस’ की भूमिका में…

भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) एमएम नरवणे ने अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि पाकिस्तान किसी भी तरह से मध्यस्थ नहीं है, बल्कि वह केवल एक कूरियर सर्विस की तरह काम कर रहा है।

शनिवार को कोलकाता में एक कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से बातचीत के दौरान नरवणे ने कहा कि किसी के नजरअंदाज होने या न होने का सवाल ही नहीं उठता। पाकिस्तान शायद ही कोई मध्यस्थ है, वह तो केवल संदेश पहुंचाने वाली कूरियर सेवा की भूमिका निभा रहा है।

हाल के महीनों में पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच संवाद स्थापित कराने की कोशिशों को अपनी कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में पेश कर रहा है। इसी संदर्भ में नरवणे की यह टिप्पणी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

अमेरिका-ईरान संघर्ष के वैश्विक व्यापार और सुरक्षा पर प्रभाव को लेकर उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है, ताकि वैश्विक संकटों और आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाओं का प्रभाव कम किया जा सके।

पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि दुनिया की भू-राजनीतिक परिस्थितियां हमेशा बदलती रही हैं और ऐसे समय में भारत को अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालना होगा।
भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण पर उन्होंने कहा कि यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।

सेना, नौसेना और वायुसेना में स्वदेशी उपकरणों और तकनीकों के उपयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है। भारत-बांग्लादेश संबंधों पर नरवणे ने विश्वास जताया कि दोनों देशों के रिश्ते फिर से सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि देशों के संबंधों में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक हैं और वर्तमान संकेत बेहतर भविष्य की ओर इशारा करते हैं।

भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के कार्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह परियोजना एक दशक से अधिक समय से जारी है। विशेष रूप से नदी क्षेत्रों में यह कार्य चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन बंगाल और बांग्लादेश के बीच शेष हिस्सों को भी अब तेजी से कवर किया जा रहा है।

ड्रोन तकनीक ने युद्ध की रणनीति को बदल दिया है

आधुनिक युद्धों में ड्रोन और यूएवी की बढ़ती भूमिका पर बोलते हुए नरवणे ने कहा कि यूक्रेन से लेकर वर्तमान अमेरिका-ईरान संघर्ष तक, ड्रोन तकनीक ने युद्ध की रणनीति को बदल दिया है। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना ड्रोन क्षमताओं को तेजी से बढ़ा रही हैं और इस क्षेत्र में स्वदेशी कंपनियों तथा एमएसएमइ की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

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