भारत ने न्यूयॉर्क शहर के नवनिर्वाचित मेयर ज़ोहरान ममदानीद्वारा जेल में बंद कार्यकर्ता उमर खालिद को भेजे गए हस्तलिखित पत्र की कड़ी आलोचना की है।
विदेश मंत्रालयके प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार (9 जनवरी 2026) को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि अन्य लोकतांत्रिक देशों की न्यायपालिका का सम्मान करना चाहिए और जन प्रतिनिधियों को अपनी सौंपी गई जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
पत्र में कही ये बात
ममदानी ने दिसंबर 2025 में उमर खालिद के माता-पिता से मुलाकात के दौरान यह पत्र सौंपा था, जो जनवरी 2026 की शुरुआत में सार्वजनिक हुआ।
पत्र में ममदानी ने लिखा कि प्रिय उमर, मुझे अक्सर कड़वाहट के बारे में आपके शब्द और इसे अपने ऊपर हावी न होने देने के महत्व की याद आती है। आपके माता-पिता से मिलकर बहुत खुशी हुई। हम सब आपके बारे में सोच रहे हैं।
यह पत्र ममदानी के 1 जनवरी 2026 को न्यूयॉर्क सिटी मेयर के रूप में शपथ ग्रहण के ठीक बाद चर्चा में आया। ममदानी, जो भारतीय मूल के पहले मुस्लिम और दक्षिण एशियाई मेयर हैं, पहले से ही उमर खालिद के प्रति समर्थन जाहिर करते रहे हैं।
भारत ने दिया करारा जबाव
MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हम अन्य लोकतांत्रिक देशों में जन प्रतिनिधियों से न्यायपालिका की स्वतंत्रता का सम्मान करने की अपेक्षा करते हैं।
व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों को व्यक्त करना पद पर बैठे लोगों को शोभा नहीं देता। ऐसी टिप्पणियों के बजाय, उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित करना बेहतर होगा।
यह बयान भारत की उस स्थापित नीति को दोहराता है कि उमर खालिद का मामला देश की आंतरिक न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इसमें विदेशी हस्तक्षेप अस्वीकार्य है।
उमर खालिद का मामला
उमर खालिद, पूर्व जेएनयू छात्र नेता, फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों (जिनमें 53 लोगों की मौत हुई थी) के सिलसिले में UAPA के तहत गिरफ्तार हैं और करीब पांच साल से तिहाड़ जेल में बंद हैं।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ अन्य आरोपियों को जमानत दी, लेकिन खालिद और शरजील इमाम को नहीं। दिसंबर 2025 में उन्हें अपनी बहन की शादी के लिए अस्थायी जमानत मिली थी।
खालिद के पिता सैयद कासिम रसूल इलियास ने बताया कि ममदानी से 9 दिसंबर 2025 को हुई मुलाकात में उन्होंने खालिद की रिहाई की बात की, लेकिन पिता ने कहा, “बस प्रार्थना करो।”