रूस के साथ जारी लंबे युद्ध के दौरान यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने अपने हथियारों के जखीरे की पेशकश की।
उन्होंने फ्लेमिंगो, सी बेबी और प्रोटेक्टर जैसे घातक ड्रोनों का जिक्र करते हुआ लिखा कि यूक्रेन अब रिमोट वॉरफेयर में काफी आगे आ चूका है।
ये ड्रोन न केवल दुश्मन के ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, साथ ही सैनिकों की जान बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
यूक्रेन ने दिखाई पॉवर
जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘फ्लेमिंगो और रुटा, पेकलो और नेपच्यून, पलियानित्सिया और विल्खा, इन सभी पर हमें गर्व है, लेकिन हम यहीं नहीं रुकेंगे।’
उन्होंने बताया कि यूक्रेन के लंबी दूरी के स्ट्राइक ड्रोनों की रेंज अब सीमा से 1,750 किलोमीटर तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा सिचेन, लियुति, मोरोक, बार्स, ओब्रिय और एफपी सिस्टम जैसे अन्य ड्रोन भी एक्टिव हैं।
घटक दड्रोंस का जखीरा
राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि भविष्य में और ज्यादा अच्छी तकनीक विकसित की जाएगी। जेलेंस्की ने ग्राउंड रोबोट्स की भी जमकर तारीफ की।
रेटेल, टेरमिट, अर्दल, रीस, जमीय, प्रोटेक्टर और वोलिया जैसे रोबोट्स ने महज तीन महीनों में 22,000 से ज्यादा मिशन पूरे किए हैं। इन मिशनों ने 22,000 से अधिक सैनिकों की जान बचाई है, क्योंकि रोबोट खतरनाक इलाकों में सैनिकों की जगह ले रहे हैं।
सी बेबी, मागुरा और सार्गन
नौसैनिक ड्रोनों के बारे में बोलते हुए राष्ट्रपति ने सी बेबी, मागुरा और सार्गन का खासतौर पर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ब्लैक सी में रूस के खिलाफ यूक्रेन के अभियान बेहद सफल रहे हैं।
ये नौसैनिक ड्रोन अब निर्यात के लिए भी उपलब्ध हैं। जेलेंस्की ने ईरान द्वारा हार्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक करने की चर्चा को ‘सैद्धांतिक’ करार देते हुए कहा कि यूक्रेन ने ब्लैक सी में वास्तविक युद्ध अनुभव हासिल किया है।
रिमोट वॉरफेयर का नया मॉडल
जेलेंस्की ने जर्मन ब्रॉडकास्टर जेडएफ को दिए इंटरव्यू में चेतावनी भी दी कि ईरान युद्ध के कारण अमेरिका के पास यूक्रेन के लिए समय नहीं बचा है।
अमेरिकी हथियार आपूर्ति एक बड़ी समस्या बन गई है, खासकर एयर डिफेंस की। यूक्रेन की यह ड्रोन रणनीति युद्ध के स्वरूप को बदल रही है।
मानव रहित हथियारों के जरिए दुश्मन पर प्रहार करते हुए अपनी सेना की क्षति को न्यूनतम रखना यह रिमोट वॉरफेयर का नया मॉडल है, जिसमें यूक्रेन विश्व स्तर पर अग्रणी साबित हो रहा है।