देशभर के हाई कोर्ट में लंबित जमानत याचिकाओं की बढ़ती संख्या के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: सूचीबद्ध करने की व्यवस्था विकसित करने और ऐसे मामलों के निपटारे के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय करने जैसे उपाय सुझाए हैं।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि उसे उम्मीद है और विश्वास है कि उच्च न्यायालय, राज्य सरकारें और जांच एजेंसियां मिलकर काम करेंगी।
इससे जमानत याचिकाओं के समय पर निपटारे के लिए एक मजबूत व्यवस्था बनेगी और पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित होगी।
पीठ ने स्पष्ट किया कि उसके आदेश को किसी भी हाई कोर्ट के कामकाज पर आक्षेप के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए और सुझावों का उद्देश्य व्यवस्थागत दक्षता को मजबूत करना है।
सर्वोच्च न्यायालय ने उस याचिका पर यह आदेश पारित किया, जिसमें उसने पूर्व में सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को अग्रिम या नियमित जमानत से जुड़ी सभी लंबित याचिकाओं का पूरा विवरण भेजने का निर्देश दिया था।
इसमें याचिका दाखिल होने की तिथि, निर्णय की तिथि या अगली सुनवाई की तिथि के साथ-साथ सजा निलंबन से संबंधित मामलों की जानकारी भी शामिल करने को कहा गया था।
पीठ ने सोमवार को पारित अपने आदेश में कहा कि ज्यादातर हाई कोर्ट ने डाटा उपलब्ध करा दिए हैं और जमानत याचिकाओं के समय पर निपटारा के लिए पहल की है।