पुडुचेरी के स्कूलों में अब मिड-डे मील में शामिल होगी मछली, बच्चों को मिलेगा पौष्टिक आहार का नया विकल्प

केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए एक बहुत बड़ी और अच्छी खबर सामने आई है। पुडुचेरी प्रशासन ने अपने स्कूलों में मिलने वाले मिड-डे मील की थाली में मछली आधारित व्यंजन शामिल करने का ऐतिहासिक प्रस्ताव रखा है।

पुडुचेरी में साल 1930 में फ्रांसीसी शासन के दौरान मिड-डे मील योजना शुरू की गई थी। तब से लेकर अब तक बच्चों को खाने में अंडे दिए जाते रहे हैं, लेकिन अब मछली के रूप में यह मेनू में पहली बार कोई मांसाहारी विकल्प जुड़ने जा रहा है।

शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में

मत्स्य मंत्री के कार्यालय से जारी एक बयान के अनुसार, शुरुआत में इस योजना को पुडुचेरी और यानम क्षेत्रों के चुनिंदा स्कूलों में एक परीक्षण के तौर पर लागू किया जाएगा।

किन राज्यों में पहले से मिल रही है मछली?

बता दें कि पुडुचेरी के इस कदम के साथ ही वह उन चुनिंदा क्षेत्रों में शामिल हो जाएगा जहां स्कूली बच्चों को मछली परोसी जाती है। वर्तमान में लक्षद्वीप में नियमित रूप से मछली परोसी जाती है, जबकि केरल के कुछ चुनिंदा स्कूलों में मछली और चिकन दिए जाते हैं। हालांकि यह पूरे राज्य में अनिवार्य नहीं है।

किन बच्चों को मिलेगा इसका लाभ?

वर्तमान में ‘पीएम पोषण’ योजना के तहत पुडुचेरी में LKG से लेकर 12वीं कक्षा तक के 65856 छात्र-छात्राएं आते हैं। यह योजना कुल 438 सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों के साथ-साथ प्री-प्र प्राइमरी के बच्चों को भी कवर करती है।

गौर करने वाली बात यह है कि आठवीं कक्षा तक के खर्च का 60% हिस्सा केंद्र सरकार उठाती है, जबकि बाकी का खर्च राज्य सरकार वहन करती है। वहीं, सीनियर कक्षाओं के लिए सारा खर्च राज्य सरकार खुद उठाती है।

बैठक में और क्या-क्या बड़े फैसले लिए गए?

यह प्रस्ताव विधानसभा में सार्वजनिक निर्माण, मत्स्य पालन और मछुआरा कल्याण मंत्री मल्लादी कृष्ण राव की अध्यक्षता में हुई एक अहम बैठक के दौरान सामने आया। इस बैठक में मरीन प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी के अध्यक्ष पी. जवाहर और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

बैठक के दौरान समुद्री संसाधनों को बढ़ावा देने, निर्यात बढ़ाने और रोजगार पैदा करने पर भी चर्चा हुई। साथ ही मछली पार्क, केकड़ा पालन, दलदली केकड़ा एक्वाकल्चर का विस्तार किया जाएगा।

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