बच्चों की सुरक्षा में नाकाम टेक कंपनियों पर जुर्माने का असर नहीं? विशेषज्ञों ने जताई चिंता…

दुनियाभर में बच्चों को इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म से दूर रखने के लिए आस्ट्रेलिया की तर्ज पर कानून बनाए जा रहे हैं और उनका पालन न करनेवाली कंपनियों पर भारी भरकम जुर्माना लगाने का भी प्रविधान किया जा रहा है।

सामान्यतया यही होता भी है।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि केवल जुर्माना लगाने से बड़ी टेक कंपनियों का आचरण नहीं बदलता। कई कंपनियां दंड को नियम उल्लंघन की कीमत मानकर काम जारी रखती हैं।

सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये जुर्माना उन कंपनियों के लिए पीड़ादायक होगा क्योंकि बड़ी संख्या में बच्चों द्वारा इंटरनेट प्लेटफार्म के इस्तेमाल से कंपनियों को जो मुनाफा होगा, वे उससे जुर्माने से हुए घाटे की भरपाई कर सकती हैं।

जुर्माना भरने में टालमटोल करती हैं कंपनियां

कई मामलों में तो कंपनियां जुर्माना भरने में टालमटोल भी करती हैं। उनसे रकम वसूलना आसान नहीं होता क्योंकि कई तरह की तकनीकी अड़चनें होती हैं।

ऑस्ट्रेलिया ने बच्चों के लिए इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म के इस्तेमाल पर रोक के लिए कानून बनाया।

बच्चों से जुड़े डाटा के अवैध इस्तेमाल पर ब्रिटेन के डाटा वाचडाग ने रेडिट पर 1.83 करोड़ डालर का जुर्माना लगाया।

अप्रैल 2025 में यूरोपीय संघ ने डिजीटल मार्केट एक्ट के उल्लंघन पर एपल पर 57.75 करोड़ डालर और मेटा पर 23.17 करोड़ डालर का जुर्माना लगाया। पिछले साल सितंबर में गूगल पर आनलाइन विज्ञापन तकनीक के दुरुपयोग पर तीन अरब यूरो का जुर्माना लगाया।

तस्मानिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार, यदि जुर्माना त्वरित, लगातार और कठोर न हो तो उसका उल्टा असर भी हो सकता है।

वर्ष 2000 के एक अध्ययन में इजरायल के बाल देखभाल केंद्रों में देर से बच्चों को लेने आने वाले अभिभावकों पर जुर्माना लगाने के बाद ऐसी घटनाएं बढ़ गई थीं, क्योंकि अभिभावकों ने इसे अतिरिक्त सुविधा की कीमत मान लिया।

विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी टेक कंपनियां अक्सर यह आकलन करती हैं कि नियम बदलने की लागत जुर्माने से अधिक है या नहीं।

यदि बदलाव महंगा पड़ता है, तो वे जुर्माना भरकर पुरानी व्यवस्था जारी रखती हैं। बड़ी कंपनियों के लिए छोटी राशि का दंड कारोबार की सामान्य लागत बन जाता है।

रिपोर्ट में क्या कहा गया?

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई मामलों में यह स्पष्ट नहीं होता कि कंपनी के भीतर सीधे जिम्मेदार कौन है, जिससे दंड का असर कम हो जाता है और दोबारा उल्लंघन की घटनाएं बढ़ती हैं।

इंटरनेट कंपनी 4चान ने ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट 2023 के तहत लगाए गए दंड को मानने से इन्कार किया, जबकि एक्स ने यूरोपीय दंड को अदालत में चुनौती दी।

शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि केवल जुर्माने के बजाय कंपनियों की नियमित निगरानी, स्वतंत्र आडिट, डाटा पारदर्शिता और नियामक संस्थाओं को अधिक संसाधन देना ज्यादा प्रभावी होगा।

इसके लिए स्वतंत्र उपभोक्ता प्रौद्योगिकी सुरक्षा अनुसंधान केंद्र बनाने की भी सिफारिश की गई है, जहां कंपनियों के एल्गोरिदम और डाटा की जांच हो सके।

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