‘यूरोप गलत राह पर है, चीन बना रहा है बेवकूफ’, दावोस में ट्रंप ने पुतिन को लेकर क्या कहा?…

 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की सालाना बैठक में यूरोप की नीतियों पर कड़ी आलोचना की। ट्रंप ने कहा कि यूरोपीय देश सही दिशा में नहीं चल रहे हैं

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापार, सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर मतभेद गहराते जा रहे हैं। 

विश्व का’आर्थिक इंजन’ है अमेरिका

ट्रंप ने अपने भाषण में अमेरिका को ‘धरती का आर्थिक इंजन’ करार दिया। उन्होंने यूरोप के कुछ हिस्सों की पहचान बदलने का जिक्र करते हुए कहा कि यूरोप सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा।

दावोस के मंच से उन्होंने साफ शब्दों में कहा, ‘अमेरिका धरती का आर्थिक इंजन है और जब अमेरिका में तेजी आती है, तो पूरी दुनिया में तेजी आती है। यह इतिहास रहा है।’

उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे यूरोप से प्यार है और मैं चाहता हूं कि यूरोप अच्छा करे, लेकिन यह सही दिशा में नहीं जा रहा है।’ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अमेरिका यूरोपीय लोगों की चिंता करता है।

यूरोप से उसके गहरे ऐतिहासिक संबंध हैं। हालांकि, ट्रंप की आलोचना यूरोप-अमेरिका संबंधों में नई चुनौतियां पैदा कर सकती है।

चीन पर कसा तंज

दावोस में बोलते हुए ट्रंप ने चीन पर तंज कसा। ट्रंप ने चीन की ग्रीन टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री पर सवाल खड़े किए। ट्रंप ने कहा कि चीन ग्रीन एनर्जी के नाम पर दुनिया को बेवकूफ बना रहा है।

ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा कि चीन में विंड फार्म सिर्फ दिखावे के लिए बनाए जाते हैं, ताकि दूसरे देश उन्हें खरीदने के लिए राजी हो सके।

ग्रीनलैंड पर दावा और NATO को धमकी 

दावोस में ट्रंप ने ग्रीनलैंड को नियंत्रित करने की अपनी पुरानी महत्वाकांक्षा को फिर से दोहराया। डेनमार्क के अधिकार वाले इस क्षेत्र पर जोर देते हुए ट्रंप ने विश्व नेताओं से कहा कि केवल अमेरिका ही इसे सुरक्षित रख सकता है।

उन्होंने कहा, ‘हम एक बड़ी शक्ति हैं, जितनी लोग समझते हैं, उससे कहीं ज्यादा बड़ी। NATO सहयोगी डेनमार्क को दूसरे विश्व युद्ध के बाद ग्रीनलैंड की सुरक्षा में मिली अमेरिकी मदद के लिए अहसानफ़रामोश बताया।

ट्रंप ने यूरोपीय सहयोगियों से ग्रीनलैंड के संभावित अमेरिकी अधिग्रहण पर चर्चा करने की बात कही। उन्होंने तर्क दिया, ‘यह सिर्फ यूनाइटेड स्टेट्स ही है जो बर्फ के इस विशाल टुकड़े की रक्षा कर सकता है, इसे विकसित कर सकता है और इसे बेहतर बना सकता है ताकि यह यूरोप के लिए अच्छा हो और यूरोप के लिए सुरक्षित हो और हमारे लिए भी अच्छा हो।’

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