एथनॉल मिश्रित ईंधन पूरी तरह सुरक्षित, सरकार ने खारिज किए सोशल मीडिया पर वायरल दावे…

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम वैज्ञानिक रूप से मान्य है और सरकार द्वारा लगातार इसकी निगरानी की जा रही है।

मंत्रालय ने कहा कि इंटरनेट मीडिया पर एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) को लेकर कुछ भ्रामक और निराधार दावे किए जा रहे हैं। कुछ पुरानी तस्वीरें और वीडियो दोबारा प्रसारित किए जा रहे हैं। इसका मकसद जनता को भ्रमित और गुमराह करना प्रतीत होता है। सरकार इसको लेकर सजग है और आवश्यक कदम उठा रही है।

मंत्रालय ने कहा कि ई-20 पेट्रोल के उपयोग के बाद से इंजन खराब होने की कोई समस्या नहीं आई है। हाल ही में इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो में ईंधन टैंक के पास चींटियों को दिखाया गया था, जिसका मंत्रालय ने खंडन किया।

कच्चे तेल के आयात को कम करने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्यों के साथ एथनाल मिश्रण कार्यक्रम 2003 में शुरू किया गया था। तकनीकी तैयारियों और हितधारकों के परामर्श के आधार पर इस कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है।

2023 से 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण (ई-20) का क्रियान्वयन है। सरकार तेल विपणन कंपनियों, ऑटोमोबाइल निर्माताओं, ईंधन परीक्षण एजेंसियों और अन्य हितधारकों के साथ परामर्श करके एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम के क्रियान्वयन की लगातार निगरानी करती है। ई-20 पेट्रोल की शुरुआत के बाद से एथनाल मिश्रण के कारण इंजन की खराबी या वाहन के टूटने की कोई व्यापक समस्या सामने नहीं आई है।

मंत्रालय ने कहा कि एथनॉल मिश्रण एक वैश्विक प्रथा है, जिसे कई देशों में सफलतापूर्वक लागू किया गया है। इस कार्यक्रम ने देश को 1.40 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद की है और किसानों की आय को भी बढ़ावा दिया है। मंत्रालय ने कहा कि यह कार्यक्रम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने में महत्वपूर्ण है।

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