प्राइवेट सेक्टर में काम कर रहे उन कर्मचारियों के लिए एक अच्छी खबर है, जिनका पीएफ कटता है। दरअसल, ईपीएस-95 उच्च पेंशन स्कीम को लेकर कर्नाटक हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। इसी मामले में 30 अप्रैल को कर्नाटक हाई कोर्ट ने ऐसा कहा है जो आपको जरूर पढ़ना चाहिए।
दरअसल, कर्नाटक हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कर्मचारियों को EPS 95 पेंशन मिल सकती है, अगर वे 1 सितंबर, 2014 को नौकरी में थे और EPS के सदस्य थे, और साथ ही उन्होंने एक जॉइंट ऑप्शन के जरिए अपनी असल सैलरी के आधार पर PF में योगदान दिया था, भले ही यह सैलरी की ऊपरी सीमा (wage ceiling caps) से सीमित था।
कोर्ट के इस फैसले से उन्हें फायदा होगा जो 2014 से पहले नौकरी कर रहे हैं, उनका पीएफ कट रहा है और जिन्होंने हायर पेंशन स्कीम को चुन रखा है। यह योजना मुख्य रूप से उन कर्मचारियों के लिए है जो 1 सितंबर, 2014 को या उससे पहले EPF/EPS के सदस्य थे, और जो उस तारीख के बाद भी सेवा में बने रहे।
EPFO की हायर पेंशन नॉर्मल EPS से कैसे अलग?
अब यहां पर बहुत से लोगों को एक कन्फ्यूजन हो रही होगी कि आखिर EPFO की हायर पेंशन (EPFO Pension) का लाभ कौन ले सकता है? यह नॉर्मल पेंशन से कितनी अलग है? आइए इसे भी जान लेते हैं।
पहले कर्मचारी पेंशन योजना को समझते हैं। प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए सरकार ने इस योजना को आधिकारिक तौर पर 19 नवंबर 1995 को शुरू की थी। इस योजना के तहत पेंशन पाने के लिए कर्मचारियों को न्यूनतम 10 साल तक नौकरी करनी जरूरी है, जिसमें उनका पीएफ कटता हो। इसमें कंपनी यानी नियोक्ता के योगदान में से 8.33% जाता है। बाकि का बचा हुआ योगदान आपके EPF अकाउंट में जाता है। EPS में कर्मचारी का योगदान नहीं जाता है।
इसमें वेतन लिमिट है। अधिकाम 15 हजार रुपये पर ही पेंशन में योगदान जमा हो सकता है। यानी भले ही आपके असली बेसिक 50 हजार हो, लेकिन यह 15 हजार के लिमिट के हिसाब से ही कटेगी।
इसी योजना के तहत सरकार ने ज्यादा पेंशन पाने के लिए कर्मचारियों को विकल्प दिया कि आप इसमें अपनी पूरी सैलरी के हिसाब से पेंशन कटवा सकते हैं। यानी जिसका मन हो वह अपनी पूरी बेसिक सैलरी के हिसाब से हायर पेंशन के लिए आवेदन कर सकता है। हालांकि, 2014 में इसे खत्म कर दिया गया। बाद में 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसले सुनाया कि जो 2014 से पहले EPFO के सदस्य थे और जिन्होंने EPS में योगदान दिया था, वह हायर पेंशन का विकल्प चुन सकते हैं।
हायर पेंशन चुनने वाले को कैसे फायदा?
जो 2014 से पहले नौकरी में थे और हायर पेंशन का विकल्प चुना था उन्हें EPS की नॉर्मल कैप लिमिट वाली से ज्यादा पेंशन मिलेगी। उदाहरण से समझें तो मान लीजिए आपकी बेसिक सैलरी 50 हजार रुपये है, तो ईपीएएस की नॉर्मल पेंशन स्कीम के तहत आपको 15 हजार की लिमिट पर ही पेंशन मिलेगी। लेकिन अगर आपने हायर पेंशन का विकल्प चुना है तो आपको 50 हजार रुपये के बेसिक सैलरी के हिसाब से ही पेंशन मिलेगी।
EPFO ने रिजेक्ट किया हायर पेंशन का क्लेम तो कोर्ट पहुंचा मामला
भले ही कर्मचारी अपनी वास्तविक सैलरी के आधार पर पेंशन फंड में योगदान देना चाहते थे, लेकिन कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने इसकी अनुमति नहीं दी। इसलिए, कर्मचारियों ने पेंशन फंड के बजाय भविष्य निधि में अपनी वास्तविक सैलरी के आधार पर ज्यादा योगदान दिया।
ईपीएफओ ने बहुत सी हायर पेंशन मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद यह पूरा मामला अदालत में पहुंचा था। न्यायमूर्ति अनंत रामनाथ हेगड़े ने सुनाया, जिन्होंने एक छूट प्राप्त ट्रस्ट कंपनी के कर्मचारियों की ज्यादा पेंशन से जुड़े EPFO के खारिज करने वाले आदेशों को रद्द कर दिया।
लेकिन अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला केवल उन कर्मचारियों पर लागू होता है जो 9 सितंबर, 2014 तक EPS पेंशन योजना के सदस्य थे, न कि उन लोगों पर जो उस तारीख से पहले रिटायर हो चुके थे।