इजरायल-हिजबुल्ला सीजफायर से बदला माहौल, अमेरिका-ईरान समझौते की संभावनाएं बढ़ीं…

लेबनान में जारी इजरायली सैन्य कार्रवाई से नाराज ईरान ने शुक्रवार से स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया।

तेहरान का कहना है कि समझौते की सबसे महत्वपूर्ण शर्तों-लेबनान में युद्धविराम और इजरायली सेना की वापसी-का पालन नहीं किया जा रहा है।

ईरान के इस रुख से मध्यस्थ देशों में हलचल मच गई और स्विट्जरलैंड में होने वाली वार्ता अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।

स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित बातचीत अगली सूचना तक नहीं होगी। इसी बीच ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आइआरजीसी) ने दबाव बढ़ाते हुए कहा कि जब तक समझौते की सभी शर्तों का पालन नहीं किया जाता, तब तक स्ट्रेट आफ होर्मुज बंद रहेगा। इस बयान के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अमेरिका ने कतर और पाकिस्तान के साथ मिलकर कूटनीतिक प्रयास तेज किए। एक ओर वाशिंगटन ने इजरायल को युद्धविराम के लिए राजी करने की कोशिश की, वहीं ईरान ने हिजबुल्ला नेतृत्व से संपर्क साधा।

रायटर ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि दोनों पक्षों के बीच भारतीय समयानुसार शाम साढ़े छह बजे से युद्धविराम लागू हो गया। इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी देखने को मिली, जो वार्ता स्थगित होने की खबर के बाद बढ़ गई थीं। वहीं, शेयर बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई।

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए निर्धारित समय से पहले ही प्रारंभिक समझौता मसौदे (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर दिए थे। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी इस पर सहमति जताई थी। हालांकि, लेबनान में इजरायली हमले जारी रहने से हालात बिगड़ गए।

फ्रांस के वर्साय पैलेस में एमओयू पर हस्ताक्षर के बाद ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को संयम बरतने की सलाह दी थी, जबकि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इजरायली मंत्रियों की बयानबाजी पर नाराजगी जताई थी। अमेरिका में इजरायल के राजदूत याशेल लीतेर ने कहा कि उनका देश युद्धविराम के प्रति प्रतिबद्ध है, लेकिन किसी भी हमले का जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखता है।

इसके बावजूद नेतन्याहू सरकार न तो सैन्य कार्रवाई रोकने को तैयार दिखी और न ही सेना की वापसी पर सहमत हुई। गुरुवार को हिजबुल्ला के हमले में चार इजरायली सैनिकों की मौत के बाद इजरायल ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी, जिसमें शुक्रवार को लेबनान में 21 लोगों की जान चली गई।

इसके बाद अमेरिका और कतर की मध्यस्थता तथा ईरानी दबाव के चलते इजरायल नरम पड़ा और हिजबुल्ला ने भी हमले रोकने का संकेत दिया।हालांकि क्षेत्रीय जानकारों का कहना है कि इससे पहले भी इजरायल और लेबनान के बीच दो बार युद्धविराम हो चुका है, लेकिन वे एक दिन भी नहीं टिक सके थे। इस बार भी सबसे बड़ा विवाद लेबनान से इजरायली सेना की वापसी को लेकर बना हुआ है।

एक वरिष्ठ हिजबुल्ला सांसद ने कहा कि ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि व्यापक युद्धविराम के बिना अमेरिका के साथ कोई बातचीत संभव नहीं है। वहीं, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि लेबनान पर इजरायली हमलों की पूरी जिम्मेदारी अमेरिका की है और तेहरान अपने हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। एपी के अनुसार, ईरान ने युद्धविराम लागू होने से पहले अपने प्रतिनिधियों को स्विट्जरलैंड भेजने से मना कर दिया।

इससे मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान को भी झटका लगा। इसके बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अपनी प्रस्तावित यात्रा स्थगित कर दी। हालांकि व्हाइट हाउस ने इसकी वजह तकनीकी जटिलताओं को बताया है।इस बीच ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने लेबनानी अखबार ‘अल अखबार’ से कहा कि एमओयू के तहत लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की गारंटी दी जानी चाहिए। इसका अर्थ है कि इजरायल को लेबनानी क्षेत्र पूरी तरह खाली करना होगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो समझौते को अमान्य माना जाएगा।सीएनएन के अनुसार, ईरानी संसद प्रमुख मोहम्मद बाकर गलीबाफ ने अमेरिका को आगाह करते हुए कहा कि बातचीत के दौरान अतिरिक्त शर्तें थोपना प्रक्रिया को पटरी से उतार सकता है। उन्होंने कहा कि यदि समझौते का उल्लंघन हुआ या अत्यधिक मांगें थोपी गईं तो ईरान कड़ा जवाब देगा। गलीबाफ ने दावा किया कि “दुश्मन पहले ही युद्ध में तमाचा खा चुका है और यदि वह फिर वही रास्ता चुनता है तो उसे और बड़ा जवाब मिलेगा।

“होर्मुज से गुजरनेवाले पंजीकरण कराएं स्ट्रेट आफ होर्मुज को लेकर गठित ईरान के नए प्राधिकरण- पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी- ने शुक्रवार को नया दिशानिर्देश जारी किया। निर्देश में कहा गया है कि स्ट्रेट से गुजरनेवाले जहाजों को पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि भले ही स्ट्रेट से गुजरना निशुल्क है, लेकिन जहाजों को आने-जाने के बारे में जानकारी दर्ज करानी होगी।

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