प्रवर्तन निदेशालय का इस वित्त वर्ष 500 आरोपपत्र दाखिल करने का टारगेट, जांच पूरी करने के लिए तय की गई 2 साल की समयसीमा…

ईडी ने मनी लांड्रिंग मामलों में इस वित्तीय वर्ष में 500 चार्जशीट दाखिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है और जांच अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि एक बार मामला दर्ज होने के बाद जांच को ”जटिल” मामलों को छोड़कर एक से दो वर्षों के भीतर पूरा किया जाना चाहिए।

ये उपाय गुवाहाटी में पिछले वर्ष 19-21 दिसंबर को आयोजित संघीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के 34वें क्षेत्रीय अधिकारियों के त्रैमासिक सम्मेलन के दौरान चर्चा की और अंतिम रूप दिए गए।

वित्त वर्ष से पहले की अंतिम बैठक

इस बैठक की अध्यक्षता ईडी के निदेशक राहुल नवीन ने की। ईडी ने बयान में कह कि पूर्वोत्तर में सम्मेलन का निर्णय इस क्षेत्र के सामरिक और परिचालन महत्व की पहचान को दर्शाता है। यह बैठक महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह इस वित्त वर्ष (31 मार्च) के अंत से पहले की अंतिम बैठक थी।

अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया कि वे अब समाप्त हो चुके विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम (फेरा) के तहत पंजीकृत सभी लंबित मामलों का निर्णय 31 मार्च तक पूरा करें। अधिकारियों को बताया गया कि इस वित्त वर्ष में 500 अभियोजन शिकायतें दाखिल करने का लक्ष्य दोहराया गया।

इस बढ़े हुए लक्ष्य की आवश्यकता लंबित जांच को सक्रिय रूप से समाप्त करने और नई जांचों के जीवन चक्र को एक से दो वर्षों के उचित समयसीमा में व्यवस्थित रूप से कम करने के लिए है। जटिल मामलों के लिए इस शर्त में छूट है।

पर्पल नोटिस का उद्देश्य

अधिकारियों को इंटरपोल जैसे तंत्रों का लाभ उठाने, घरेलू भारतपोल का उपयोग करने विशेष रूप से ”पर्पल” नोटिस जारी करने की सलाह दी गई। इंटरपोल द्वारा जारी ”पर्पल” नोटिस का उद्देश्य अपराधियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले कार्यप्रणाली, वस्तुओं, उपकरणों और छिपाने के तरीकों की जानकारी लेना-देना है।

ईडी के जांचकर्ताओं को देश में अवैध सट्टेबाजी व आनलाइन गेमिंग प्लेटफार्मों के प्रसार की जांच करने, शेयर बाजार में हेरफेर से मनी लांड्रिंग की निगरानी और अस्थिर गतिविधियों या राष्ट्र-विरोधी उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जा सकने वाले विदेशी फंडिंग चैनलों के प्रति सतर्क रहने के लिए भी कहा गया। 

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