‘चुनाव आयोग SIR में त्रुटिपूर्ण नामों की सूची दे’, बिहार में SIR के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा…

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि वह विभिन्न राज्यों में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (एसआइआर) के दौरान ”तर्कसंगत विसंगतियों” या त्रुटियों की सूची में शामिल नामों को ग्राम पंचायत भवनों और ब्लॉक कार्यालयों में प्रदर्शित करें, जहां दस्तावेज और आपत्तियां भी प्रस्तुत की जाएंगी।

इसके अलावा, सर्वोच्च अदालत ने बिहार में चुनावी मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआइआर) के खिलाफ दायर याचिकाओं के एक समूह पर अपना फैसला सुरक्षित रखा, जिसमें गैर सरकारी संगठन ‘एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफा‌र्म्स'(एडीआर) की याचिका भी शामिल है।

कोर्ट उन याचिकाओं की जांच कर रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि चुनाव आयोग के पास संविधान के अनुच्छेद 326, 1950 के प्रतिनिधित्व अधिनियम और इसके तहत बनाए गए नियमों के तहत इस तरह के बड़े पैमाने पर एसआइआर करने की शक्तियां नहीं हैं।

बिहार में पुनरीक्षण के पूरा होने के बाद यह प्रक्रिया नौ राज्यों छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, बंगाल और तीन केंद्र शासित प्रदेशों (अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप और पुडुचेरी) में चल रही है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जायमाल्या बागची की पीठ ने गुरुवार को वरिष्ठ अधिवक्ताओं कपिल सिब्बल, अमित आनंद तिवारी और वकील विवेक ¨सह की दलीलें सुनीं, जिन्होंने द्रमुक की ओर से कहा कि ”तर्कसंगत विसंगतियों” की सूची में शामिल मतदाताओं को चुनावी सूची में शामिल होने का उचित समय और अवसर दिया जाना चाहिए, विशेषकर चुनावी तमिलनाडु में।

पीठ ने उन राज्यों के लिए सामान्य निर्देश जारी किए, जहां एसआइआर चल रहा है और नोट किया कि चुनाव आयोग के नोटिस जारी किए गए हैं और उन्हें तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया है (मानचित्रित, अमानचित्रित और तर्कसंगत विसंगति)।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘तर्कसंगत विसंगति’ श्रेणी के तहत पिता के नाम या माता-पिता की उम्र में असमानताएं और दादा-दादी की उम्र में अंतर को अधिकारियों द्वारा देखा गया है।

पीठ ने कहा, ”पार्टी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि तर्कसंगत विसंगतियों की श्रेणी में पिता के नाम की असमानता, माता-पिता की उम्र में असमानता, माता-पिता की उम्र में 50 वर्ष से अधिक का अंतर, दादा-दादी की उम्र में 40 वर्ष से कम का अंतर, और छह से अधिक संतान वाले लोग शामिल हैं।”

पीठ के जारी निर्देश

  • तर्कसंगत विसंगतियों की श्रेणी में शामिल व्यक्तियों को सक्षम बनाने के उद्देश्य से पीठ ने कुछ निर्देश जारी किए।
  • तर्कसंगत विसंगतियों में शामिल व्यक्तियों के नाम ग्राम पंचायत भवनों, हर तालुका (उप-विभाग) के सार्वजनिक स्थलों और शहरी क्षेत्रों के वार्ड कार्यालयों में प्रदर्शित किए जा सकते हैं।” संभावित प्रभावित व्यक्तियों को उनके अधिकृत प्रतिनिधि के जरिये अपने दस्तावेज या आपत्तियां प्रस्तुत करने की अनुमति दी गई है। ऐसा अधिकृत प्रतिनिधि एक बीएलए भी हो सकता है।
  • चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि पंचायत भवनों में सूचियों के प्रदर्शित होने की तिथि से सभी व्यक्तियों को, जिन्होंने अभी तक अपने दावे, दस्तावेज या आपत्तियां प्रस्तुत नहीं की हैं, उन्हें ऐसा करने के लिए अतिरिक्त 10 दिनों का समय दिया जाए। जिस अधिकारी को दस्तावेज मिलेंगे या प्रभावित व्यक्तियों की सुनवाई करेंगे, वह कागजात की प्राप्ति और सुनवाई के संचालन का प्रमाण पत्र भी दे सकता है।

विशेषज्ञ डॉक्टर से वांगचुक की जांच कराएं : सुप्रीम कोर्ट


पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा पेट की समस्याओं की शिकायत के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उनकी विशेषज्ञ डाक्टर से जांच कराने का निर्देश दिया। 59 वर्षीय वांगचुक जोधपुर केंद्रीय कारागार में हिरासत में हैं।

जस्टिस अरविंद कुमार और पीबी वराले की पीठ ने जेल अधिकारियों को सोमवार तक वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि दूषित पानी की वजह से उनके पेट में दिक्कत है। वह डाक्टर से जांच करवाना चाहते हैं, लेकिन कोई नहीं आता है।

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