बड़ी होती बुजुर्ग आबादी, सबको काम दिलाना बना चीन के लिए चुनौती…

बीजिंग के दक्षिणी बाहरी इलाके मजूकियाओ में सुबह चार बजे से ही चौराहा गुलजार होने लगता है।

फ्लोरोसेंट रोशनी में नाश्ते के ठेले चमकने लगते हैं, जहां सैकड़ों दिहाड़ी मजदूर भाप में पके बन्स खाते है। इन्हें भर्तीकर्ताओं का इंतजार होता है।

सूरज की पहली किरण के साथ ही भर्तीकर्ता इलेक्ट्रिक स्कूटरों पर आते हैं जो निर्माण, सफाई या कारखाने के काम के लिए 170-180 युआन (2000 से 2124 रुपये) की मजदूरी की पेशकश करते हैं।

यह बीजिंग का सबसे बड़ा दिहाड़ी मजदूर बाजार है, जहां देशभर से लोग बेहतर जिंदगी की तलाश में आते हैं।

सुबह 8 बजे तक भीड़ छंटने लगती है। भाग्यशाली मजदूर मिनीवैन में काम पर चले जाते हैं, जबकि अन्य अगले भर्तीकर्ता का इंतजार करते हैं या खाली हाथ लौटना पड़ता है।

यह स्थिति दशकों से बनी रही, लेकिन अब चीन की आर्थिक मंदी ने इसे बदल दिया है।

रियल एस्टेट और कारखानों में नौकरियां कम हो रही हैं और कारखाने अब युवा, कुशल मजदूरों को प्राथमिकता देने लगे हैं। बुजुर्ग मजदूरों को ठंड में इंतजार करना पड़ता है।

40 साल की उम्र में ही रिटायर

43 साल की वांग लियुआन जैसी महिलाएं इस बाजार में रोजगार की तलाश करती हैं, लेकिन उम्र और कम शिक्षा उनकी राह में बाधा बन जाती है। 2022 में वांग को दवा कारखाने से निकाल दिया गया और अब वह युवा व पढ़े-लिखे लोगों से पीछे रह जाती हैं।

उन्होंने कहा, ’40 साल की उम्र में ही आप यहां रिटायर हो चुके होते हैं। भर्तीकर्ताओं की आवाजें और हताशा का शोर बाजार में गूंजता है, जहां कभी-कभी फिल्मों के लिए छोटे रोल जैसे प्रस्ताव भी मिल जाते हैं, लेकिन कम मजदूरी के कारण लोग मना कर देते हैं।

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