पेपर लीक होने के बाद नीट-यूजी के परीक्षा पैटर्न पर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। कहा जा रहा है कि इसे फूलप्रूफ बनाना है तो परीक्षा के पैटर्न में बदलाव करना ही होगा। हालांकि यह कोई नई बात नहीं है।
2024 में जब नीट-यूजी का पेपर लीक हुआ था, तो उस समय परीक्षा में सुधार के लिए जो हाईपावर कमेटी बनाई गई थी, उसने भी परीक्षा पैटर्न में बदलाव की सिफारिश करते हुए इसे कंप्यूटर के जरिये यानी सीबीटी मोड में या फिर हाइब्रिड मोड में कराने का सुझाव दिया था।
इन सुझावों को दिए हुए डेढ़ वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इस परीक्षा का पैटर्न जस का तस यानी जैसे पेन-पेपर मोड में होता था, वैसे ही रखा गया है। इस बीच परीक्षा पैटर्न में बदलाव को लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्रालयों के बीच कई दौर की बैठक भी हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई।
‘स्वास्थ्य मंत्रालय परीक्षा पैटर्न में बदलाव पर सहमत नहीं’
शिक्षा मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्रालय परीक्षा पैटर्न में बदलाव पर सहमत नहीं है। वैसे भी मेडिकल में दाखिले से जुड़ी परीक्षा नीट-यूजी का आयोजन पूरी तरह से स्वास्थ्य मंत्रालय का है। इसे सिर्फ शिक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाला एनटीए आयोजित कराता है।
यह भी इसलिए क्योंकि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर की सभी बड़ी परीक्षाओं के आयोजन के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) का गठन कर रखा है।
स्वास्थ्य-शिक्षा मंत्रालयों में फिर शुरू हुई चर्चा
परीक्षा पैटर्न में बदलाव को लेकर कई प्रमुख कोचिंग संस्थानों के प्रमुखों ने इंटरनेट मीडिया के जरिये सुझाव दिए हैं। केंद्र सरकार से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो पेपर लीक के बाद हाईपावर कमेटी के सुझावों पर अमल नहीं होने को लेकर फिर से सवाल खड़े किए जा रहे है, ऐसे में शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने इस मुद्दे पर फिर से विमर्श किया है।
सूत्रों का दावा है कि चर्चा के दौरान दोबारा होने वाली नीट-यूजी परीक्षा को कैसे फूलप्रूफ बनाया जाए, इस पर विमर्श हुआ है। इसमें परीक्षा को हाइब्रिड मोड में कराने के मुद्दे पर भी चर्चा शुरू हुई है।
जेईई-मेन की तर्ज पर होगा नीट?
इसमें प्रश्नपत्रों को छपवाने व सुरक्षित परिवहन कराने के स्थान पर इसे जेईई-मेन की तरह परीक्षा से आधे घंटे पहले ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों को भेजने और पासवर्ड से खोलने जैसी व्यवस्था है। बाद में इसे परीक्षा केंद्रों पर ही एक प्रिटर के जरिये छापकर तुरंत छात्रों में वितरण करने जैसे इंतजाम करने का सुझाव है।