ईडी की नई रणनीति: गिरफ्तारियां घटीं, लेकिन अपराधियों पर कसा शिकंजा; कुर्की में बना रिकॉर्ड…

ईडी की वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट एक बड़े बदलाव की कहानी बयां करती है। इस साल के आंकड़े स्पष्ट कर रहे हैं कि जांच एजेंसी ने अपनी कार्यप्रणाली में एक ऐसा बदलाव किया है, जहां संख्या से अधिक ‘असर’ पर जोर है।

कुर्की का बना रिकॉर्ड

जहां एक ओर मनी लांड्रिंग के मामलों में गिरफ्तारियों का सिलसिला लगभग 27 फीसदी कम हुआ है, वहीं दूसरी ओर एजेंसी ने अपने छापों और संपत्ति कुर्क करने के मामलों में अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाया है।

इस अवधि के दौरान कुर्क की गई संपत्तियों का मूल्य 81 हजार करोड़ रुपये से अधिक के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। यह इस बात का संकेत है कि अब जांच ‘भीड़’ पर नहीं, बल्कि पक्के ‘साक्ष्यों’ पर केंद्रित है।

गिरफ्तारियों में कटौती, जांच में सटीकता

एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 156 लोगों की गिरफ्तारी हुई, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 214 थी। इसके विपरीत, छापेमारी का आंकड़ा पिछले वर्ष के 1,491 से दोगुना होकर 2,892 पहुंच गया है।

ईडी का तर्क है कि अब उनकी जांच अधिक ‘लक्षित’ और ‘साक्ष्य-आधारित’ है। वे केवल भौतिक छापों पर निर्भर नहीं हैं; बल्कि क्रिप्टोकरेंसी, ब्लॉक-चेन एनालिटिक्स और रियल-टाइम डाटा ट्राइएंगुलेशन के जरिये अपराधियों के डिजिटल फुटप्रिंट्स को खंगाल रहे हैं।

इसी तकनीक का नतीजा है कि ईडी ने रिकॉर्ड 812 चार्जशीट दाखिल की हैं और केस की औसत अवधि को तीन-चार साल से घटाकर महज एक-डेढ़ साल पर ला खड़ा किया है।

पीड़ितों को मिला न्याय, लौटाया करोड़ों का धन

इस रिपोर्ट का सबसे मानवीय पहलू वह है जो ठगे गए पीड़ितों के चेहरों पर राहत की मुस्कान लाता है। ईडी ने इस साल 81,422 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है, जो अब तक का ऐतिहासिक स्तर है। लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण है ‘रेस्टीट्यूशन’ (संपत्ति की बहाली), यानी पीड़ितों को उनका डूबा हुआ धन वापस लौटाना।

एजेंसी ने अपने 15 हजार करोड़ रुपये के लक्ष्य को कहीं पीछे छोड़ते हुए, 32,678 करोड़ रुपये की संपत्ति पीड़ितों (निवेशकों, घर खरीदारों और बैंकों) को वापस दिलाई है।

विदेशी मोर्चे पर भी एजेंसी का दायरा बढ़ा

पीएसीएल पोंजी केस में मिली बड़ी सफलता ने इसमें अहम भूमिका निभाई है। विदेशी मोर्चे पर भी एजेंसी का दायरा बढ़ा है, जिसके तहत 353 अंतरराष्ट्रीय कानूनी अनुरोध लंबित हैं।

यह रिपोर्ट साफ करती है कि ईडी की नई कार्यशैली अब अपराधियों की जेब पर भारी पड़ रही है और आम जनता का भरोसा बहाल कर रही है।

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