ईडी ने बुधवार को आरोप लगाया कि सोने की रिफाइनिंग और आभूषण बनाने वाली कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स के मुख्य कारोबारी संकेतक (की बिजनेस इंडिकेटर्स) में काफी बातें सामान्य व्यावसायिक तरीकों से अलग थीं। इसके अलावा उनमें विदेशी लेन-देन से जुड़े रिकार्ड्स भी उपलब्ध नहीं थे।
ईडी ने मंगलवार को राजेश एक्सपोर्ट्स और उससे जुड़े लोगों के विरुद्ध विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के उल्लंघन के लिए छापेमारी करने के बाद बुधवार को एक बयान जारी कर बताया कि कंपनी के विरुद्ध कम से कम पांच मामलों की पहचान की गई है और तलाशी के दौरान दोष साबित करने वाले कई दस्तावेज और डिजिटल उपकरण बरामद किए।
कंपनी ने अभी तक ईडी की कार्रवाई के बारे में कोई प्रतिक्रया व्यक्त नहीं की है। वहीं बांबे स्टाक एक्सचेंज ने भी कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा है।
ईडी के मुताबिक, राजेश एक्सपोर्ट्स अपने विदेशी लेन-देन के दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रही, जिससे इन लेन-देन के वास्तविक होने का सत्यापन करना लगभग नामुमकिन हो गया।
इन दस्तावेज में कंपनी के आयात, निर्यात, विदेशी निवेश और विदेशी व्यापार प्राप्तियां एवं भुगतान का निपटान शामिल है। ईडी ने कहा, “उदाहरण के तौर पर अफ्रीकी खदानों में 1,035 करोड़ रुपये के कथित निवेश के तत्कालीन रिकार्ड व दस्तावेज न तो मिले और न ही कंपनी ने अभी तक दिए हैं।”
ईडी ने दावा किया कि कंपनी के “की बिजनेस इंडिकेटर्स” सामान्य व्यावसायिक तरीकों से काफी अलग थे। उदाहरणार्थ, वरिष्ठ प्रबंधन को दिया जाने वाला वेतन कंपनी के ऑपरेशंस के स्केल की तुलना में बहुत कम थी।
जैसे मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) को 2020 से कोई वेतन नहीं मिला, जबकि प्रबंध निदेशक को हर माह सिर्फ 17,000 रुपये दिए गए, जबकि कंपनी ने लगभग 7.7 लाख करोड़ रुपये का समेकित राजस्व दर्ज किया था।
ईडी ने आरोप लगाया कि एनआरआई बेनामीदारों का इस्तेमाल करके शेयरों में हेराफेरी के जरिये भारत से 600 करोड़ रुपये से अधिक निकाले गए।
ईडी ने यह भी कहा कि तलाशी के दौरान स्टाक के सत्यापन से पता चला कि फैक्ट्री रजिस्टर में दर्ज स्टाक और परिसर में मिले वास्तविक सामान में लगभग 40 प्रतिशत का अंतर था।