सरकार ने सोमवार को लोकसभा को बताया कि प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (पीएमआइएस) के तहत दिए गए प्रस्तावों को कई उम्मीदवारों द्वारा स्वीकार न करने के कारणों में स्थान, इंटर्नशिप की लंबी अवधि शामिल हैं।
योजना के पहले और दूसरे चरण में, 16 हजार से अधिक इंटर्न ने अपनी इंटर्नशिप में शामिल हुए, जबकि कुल प्रस्तावों की संख्या 1.65 लाख से अधिक रही। इस योजना को लागू कर रहे कॉरपोरेट मंत्रालय ने देशभर में प्रस्तावों की कम स्वीकृति का विश्लेषण किया है।
12 महीने की इंटर्नशिप
कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने बताया, 12 महीने की इंटर्नशिप अवधि सामान्य कौशल विकास कार्यक्रमों की तुलना में लंबी है। ये निष्कर्ष मंत्रालय द्वारा किए गए स्वतंत्र मूल्यांकन और फीडबैक सर्वेक्षणों और विभिन्न हितधारकों जैसे उम्मीदवारों, उद्योग और उद्योग संघों तथा राज्य सरकारों से प्राप्त फीडबैक पर आधारित हैं।
योजना के तहत इंटर्न के लिए मासिक वित्तीय सहायता मार्च से नौ हजार रुपये निर्धारित की गई है। कुल राशि में से संबंधित कंपनी अपने अपने फंड से 900 रुपये देती है, जबकि सरकार शेष 8,100 रुपये देती है। यदि वे चाहें, तो कंपनियाँ अपने फंड से इंटर्न को अधिक राशि भी दे सकती हैं।
मल्होत्रा ने कहा, पीएम इंटर्नशिप योजना पायलट प्रोजेक्ट के पहले चरण में लगभग 1.81 लाख उम्मीदवारों से 6.21 लाख से अधिक आवेदन मिले। साझेदार कंपनियों ने 60 हजार से अधिक उम्मीदवारों को 82 हजार से अधिक इंटर्नशिप प्रस्ताव दिए और 8,700 से अधिक इंटर्न ने इंटर्नशिप में शामिल हुए।
पीएम इंटर्नशिप योजना पायलट प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में 2.14 लाख आवेदकों से 4.55 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। साझेदार कंपनियों ने 71 हजार से अधिक उम्मीदवारों को 83 हजार से अधिक प्रस्ताव दिए और 7,300 से अधिक इंटर्न ने अपनी इंटर्नशिप में शामिल हुए।