प्री-मानसून गतिविधियों के तेज होने और लगातार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों के कारण उत्तर भारत सहित देश के बड़े हिस्से में मौसम ने गुरुवार को रंग बदला।
झुलसा देने वाली गर्मी से लोगों को राहत मिली। दोपहर बाद उत्तर भारत में कई जगह तेज अंधड़ के साथ बारिश आई।
एनसीआर में कई जगह ओलावृष्टि भी हुई। इससे तापमान में गिरावट आई है।
अगले एक सप्ताह तक आंधी, बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं का सिलसिला जारी रह सकता है। इसका सबसे बड़ा असर गर्मी पर पड़ेगा और हीटवेव यानी लू पर अस्थायी ब्रेक लग जाएगा।
48 घंटों में बदलेगा मौसम
मौसम विभाग (आइएमडी) के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत इस बदलाव का केंद्र बना हुआ है। 48 घंटों में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में एक मई से लेकर छह मई के बीच रुक-रुक कर बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के आसार हैं।
गुरुवार को केदारनाथ, बदरीनाथ, हेमकुंड साहिब सहित पिथौरागढ़ की उच्च हिमालयी चोटियों पर जमकर हिमपात हुआ। हिमाचल के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी बर्फबारी हुई। हफ्ते भर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।
पहाड़ों में ऐसी गतिविधियां सीधे मैदानी इलाकों पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को प्रभावित करेंगी। देश के एक बड़े हिस्से में तीन से छह मई के बीच कई दौर की हल्की से मध्यम वर्षा, आंधी और बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं।
एनसीआर के मौसम में विशेष हलचल होगी। यहां 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। साथ में बारिश और ओलावृष्टि की भी संभावना है। इससे तापमान में पांच-छह डिग्री तक गिरावट आएगी, जोकि गर्मी से राहत देगा।
राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मौसम का ढंग मिश्रित रहेगा। पश्चिमी राजस्थान में एक से तीन मई तक लू चलने की संभावना है, लेकिन इसके बाद वही क्षेत्र आंधी-बारिश की चपेट में आ सकता है। यह बदलाव दर्शाता है कि मौसमी संक्रमण का दौर चरम पर है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी कहीं लू तो कहीं बारिश का दौर जारी रह सकता है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी अगले पांच दिनों तक आंधी और मध्यम बारिश का अनुमान है। हालांकि कुछ स्थानों पर गर्मी बनी रह सकती है, लेकिन समग्र रूप से तापमान में नरमी आएगी।
विदर्भ क्षेत्र में भी राहत के संकेत हैं। पूर्वोत्तर भारत में सबसे अधिक तीव्र असर देखने को मिलेगा। असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी है। यहां तेज हवाओं और बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ सकती हैं, जिससे बाढ़ और भूस्खलन का जोखिम भी बढ़ेगा।
मौसम में आए इस बदलाव को मौसम विशेषज्ञ पश्चिमी विक्षोभों का परिणाम मान रहे हैं, जो प्री-मानसून चरण को मजबूत कर रहा है। उनका मानना है कि मई के अगले पखवाड़े के दौरान हीटवेव की वापसी भी होगी।
बिहार-झारखंड में बन सकते हैं काल बैसाखी जैसे हालात
पूर्वी भारत में भी मौसमी गतिविधियां तेज होंगी। बिहार, झारखंड और बंगाल में काल बैसाखी जैसे हालात बन सकते हैं। 60 से 70 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाएं, ओलावृष्टि और बिजली गिरने का खतरा फसलों और जनजीवन दोनों के लिए चुनौती बन सकता है।
पटना, गया, दरभंगा और भागलपुर जैसे क्षेत्रों में विशेष सतर्कता की जरूरत है। बता दें कि काल बैसाखी एक मौसम संबंधी घटना है जिसमें अप्रैल और मई के महीनों के दौरान अचानक मौसम परिवर्तन होता है, तेज हवाएं चलती हैं और तूफान आते हैं।