म्यांमार के गृहयुद्ध में ड्रोन बने बड़ा हथियार, सेना कर रही बड़े पैमाने पर इस्तेमाल…

म्यांमार के गृहयुद्ध में कम लागत वाली उड़ने वाली मशीनें (जैसे पैरामोटर और जायरोकाप्टर) तबाही मचाने वाले घातक हथियार बन चुकी हैं। म्यांमार की सेना विद्रोहियों और नागरिक इलाकों पर हमले के लिए इनका धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रही है।

म्यांमार की सेना ने 2021 में लोकतांत्रिक सरकार का तख्तापलट कर दिया था। तब से इस देश में गृहयुद्ध में लगभग एक लाख से ज्यादा लोग मारे गए हैं।

पैरामोटर पैराग्लाइडर होता है। इसमें पैराशूट जैसा कैनोपी और एक हार्नेस होता है जो सीट का काम करता है। आम तौर पर यह दो बम ले जा सकता है। सैनिक हवा में उड़ते हुए अपने हाथों से नीचे मोर्टार के गोले या बिना गाइडेंस वाले बम गिराता हैं, वहीं जायरोकॉप्टर छोटा हेलीकॉप्टर जैसा एयरक्राफ्ट होता है।

यह पैरामोटर की तुलना में अधिक तेजी से, ज्यादा ऊंचाई पर और भारी हथियारों के साथ दूर तक हमला करने में सक्षम है।

म्यांमार की सेना तीन सीटों वाले जाइरोकॉप्टर का इस्तेमाल कर रही है। इनमें मेटल फ्रेम लगा होता है जिसमें आठ मोर्टार शेल रखे जा सकते हैं। इसमें पीछे की तरफ थ्रस्ट (धक्का) देने के लिए प्रोपेलर और ऊपर की तरफ लिफ्ट (ऊपर उठाने) देने के लिए रोटर ब्लेड होता है। ये मशीनें ड्रोन से सस्ती होती हैं और लड़ाकू विमानों से तो कहीं ज्यागा सस्ती होती हैं।

इन मशीनों को टेक-ऑफ और लैंडिंग के लिए बहुत कम जगह की जरूरत होती है। बागी ‘नेशनल यूनिटी गवर्नमेंट’ के मुताबिक, पिछले साल सेना ने पैरामोटर और जाइरोकॉप्टर से हमले बढ़ा दिए और पिछले 20 महीनों में 1,600 से ज्यादा बार बमबारी के लिए इनका इस्तेमाल किया है।

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