अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर सख्त बयान दिया है।
परमाणु कार्यक्रम और युद्धविराम वार्ता पर जारी गतिरोध के बीच ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर तेहरान जल्द समझौते के लिए आगे नहीं बढ़ा तो ईरान का कुछ भी नहीं बचेगा।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत ठप पड़ी हुई है और मध्य-पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दी चेतावनी
डोनल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, ‘ईरान के लिए घड़ी तेजी से चल रही है। उन्हें बहुत जल्दी कदम उठाने होंगे, नहीं तो उनका कुछ भी नहीं बचेगा। समय बेहद महत्वपूर्ण है।’
ट्रंप की यह टिप्पणी ईरान की उस प्रतिक्रिया के बाद आई है, जिसमें उसने अमेरिका की ओर से बातचीत के लिए रखे गए पांच सूत्रीय प्रस्ताव पर ठंडा रुख दिखाया था।
नेतन्याहू से हुई बातचीत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने रविवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत भी की। इजरायली मीडिया आउटलेट कान (Kan) के अनुसार, दोनों नेताओं ने ईरान के साथ दोबारा संघर्ष भड़कने की संभावना पर चर्चा की।
इसके अलावा ट्रंप ने नेतन्याहू को अपनी हालिया चीन यात्रा की जानकारी भी दी। माना जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल दोनों ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर एक समान रणनीति पर काम कर रहे हैं।
अमेरिका की 5 सूत्रीय मांगें क्या हैं?
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स के अनुसार, अमेरिका ने बातचीत के लिए ईरान के सामने पांच प्रमुख शर्तें रखी हैं।
- ईरान अपने यूरेनियम भंडार को अमेरिका को सौंपे
- तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त सीमाएं स्वीकार करे
- क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों में कमी लाए
- अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण को पूरी अनुमति दे
- पश्चिमी देशों के साथ सुरक्षा समझौते पर सहमति जताए
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि अमेरिका ने ईरान की जमी हुई संपत्तियों का केवल 25% भी जारी करने से इनकार कर दिया। साथ ही युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई करने से भी मना कर दिया।
ईरान की शर्तें भी बनीं बड़ी बाधा
दूसरी ओर, ईरान ने भी अपनी तरफ से कई मांगें रखी हैं।
- तेहरान चाहता है कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त किया जाए।
- इजराइल के साथ चल रहे तनाव को खत्म किया जाए।
- अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगाया गया नौसैनिक प्रतिबंध हटाए।
- ईरान के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों में ढील दी जाए।
इन्हीं मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है।
एक महीने पहले हुआ था युद्धविराम
करीब एक महीने पहले अमेरिका और ईरान एक अस्थायी युद्धविराम पर सहमत हुए थे। हालांकि यह समझौता काफी कमजोर माना जा रहा है। इसके बाद भी दोनों देशों के बीच कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। तेल आपूर्ति प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। इससे दुनिया भर के शेयर बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ा है।
ट्रंप पर बढ़ रहा राजनीतिक दबाव
रिपोर्ट्स के अनुसार, लगातार बढ़ते तनाव और ऊर्जा संकट का असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले यह मुद्दा ट्रंप प्रशासन के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकता है।