कोर्ट में मान्य होंगे बैंकों के डिजिटल रिकॉर्ड, वित्त मंत्री ने लोकसभा में पेश किया बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल…

बैंकों में रखे जाने वाले डिजिटल रिकार्ड को भी आने वाले दिनों में बतौर सुबूत अदालतों में पेश किया जा सकेगा।

अभी देश में जो कानून है, उसके मुताबिक बैंकों के कागजी रिकार्ड ही सुबूत माने जाते हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में “बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026” पेश किया।

यह विधेयक 125 साल पुराने “बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891” की जगह लेगा। विधेयक का उद्देश्य है डिजिटल बैंकिंग के दौर में बैंक रिकार्ड को अदालती सुबूत के रूप में आसानी से स्वीकार करने का आधुनिक और तकनीक आधारित कानूनी ढांचा तैयार करना।

वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि बैंकों के सारे कामकाज अब डिजिटल होने लगे हैं। बैंकों के रिकार्ड अब इलेक्ट्रानिक, डिजिटल, वर्चुअल और क्लाउड-आधारित रूप में बनाए और रखे जाते हैं। इसे देखते हुए पहले से चले आ रहे विधेयक में बदलाव करना आवश्यक हो गया है, ताकि वर्तमान बैंकिंग प्रणाली की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

डिजिटल भुगतान, यूपीआइ, आनलाइन बैंकिंग और क्लाउड स्टोरेज के युग में पुराना कानून अप्रासंगिक हो चुका था। साइबर धोखाधड़ी, आनलाइन स्कैम और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में बैंक रिकार्ड सुबूत के रूप में बेहद जरूरी होते हैं। नया कानून अदालतों और जांच एजेंसियों को वैध मामलों में आसानी से डिजिटल सुबूत उपलब्ध कराने में मदद करेगा, जबकि बैंकों को अनावश्यक अदालती प्रक्रिया से बचाएगा।

नए कानून में बैंकर्स बुक्स की परिभाषा में भौतिक, इलेक्ट्रानिक, डिजिटल, वर्चुअल, क्लाउड-आधारित या किसी अन्य रूप में रखे गए सभी रिकार्ड शामिल होंगे। यह ढांचा भविष्य की तकनीक के लिए भी तैयार रहेगा। सारे डिजिटल रिकार्ड को मैनुअल, डिजिटल या इलेक्ट्रानिक हस्ताक्षर से प्रमाणित किया जा सकेगा।

इलेक्ट्रानिक रिकार्ड भौतिक या इलेक्ट्रानिक रूप में पेश किए जा सकेंगे। इसमें यह भी प्रस्तावित है कि जब बैंक पक्षकार न हो तो अदालत लिखित आदेश से ही बैंक अधिकारी को दस्तावेज पेश करने या गवाह के रूप में बुला सकेगी। इससे बैंक कर्मचारियों पर अनावश्यक बोझ कम होगा।

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