बिहार-झारखंड के बीच बढ़ी मुश्किलें, मनिहारी-साहिबगंज जहाज सेवा बंद; दो बार टेंडर फेल होने से नहीं मिला ऑपरेटर…

गंगा नदी पर चलने वाली महत्वपूर्ण मनिहारी–साहिबगंज फेरी सेवा एक अप्रैल 2026 से पूरी तरह बंद पड़ी है। यात्री और मालवाहक जहाजों का संचालन ठप होने से बिहार और झारखंड के बीच आवाजाही और व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

यह सेवा लंबे समय से दोनों राज्यों के लिए जीवनरेखा मानी जाती रही है, लेकिन अब संचालक नहीं मिलने के कारण इसका भविष्य अधर में लटक गया है।

दो बार निविदा, लेकिन कोई आगे नहीं आया

फेरी सेवा की बंदोबस्ती को लेकर जिला प्रशासन द्वारा अब तक दो बार निविदा जारी की जा चुकी है, लेकिन दोनों बार कोई भी डाकवक्ता (बोली लगाने वाला) सामने नहीं आया।

इसके कारण सेवा का संचालन शुरू नहीं हो सका है। प्रशासन की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन किसी एजेंसी की रुचि नहीं दिखने से स्थिति जटिल बनी हुई है।

अंतरराज्यीय सेवा पूरी तरह बंद

मनिहारी–साहिबगंज के बीच चलने वाली यह फेरी सेवा यात्री और माल दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। लेकिन एक अप्रैल 2026 से इसका परिचालन पूरी तरह बंद हो गया है। इससे रोजाना यात्रा करने वाले लोगों के साथ-साथ व्यापारियों और मालवाहक वाहनों पर भी गंभीर असर पड़ा है। कई लोगों को अब लंबा सड़क मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ गए हैं।

पुरानी व्यवस्था और संचालन प्रक्रिया

इस फेरी सेवा की बंदोबस्ती हर दो साल में बारी-बारी से साहिबगंज और कटिहार जिला प्रशासन द्वारा की जाती है। वर्ष 2024-2025 और 2025-2026 के लिए यह जिम्मेदारी साहिबगंज प्रशासन के पास थी।

उस दौरान भी किसी निजी संचालक ने रुचि नहीं दिखाई थी, जिसके बाद सरकारी निगरानी में ही सेवा का संचालन कराया गया था। अब यह अवधि समाप्त होने के बाद वर्ष 2026-2027 और 2027-2028 के लिए बंदोबस्ती की प्रक्रिया कटिहार जिला प्रशासन को करनी है।

फेरी सेवा बंद होने से बढ़ी परेशानी

फेरी सेवा बंद होने का सबसे अधिक असर सीमांचल और झारखंड क्षेत्र के लोगों पर पड़ा है।

  • यात्रियों को अब लंबा सड़क मार्ग अपनाना पड़ रहा है
  • माल ढुलाई की लागत बढ़ गई है
  • छोटे व्यापारियों को नुकसान हो रहा है
  • स्थानीय बाजारों की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है

लोगों का कहना है कि यह सेवा उनके दैनिक जीवन और आर्थिक गतिविधियों के लिए बेहद जरूरी थी।

व्यापारियों और स्थानीय लोगों की चिंता

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि फेरी सेवा बंद होने से सामान की ढुलाई में समय भी अधिक लग रहा है और खर्च भी बढ़ गया है। कई छोटे व्यापारी इस स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित हैं, क्योंकि उनका व्यापार सीधे तौर पर नदी मार्ग पर निर्भर था।

प्रशासन के प्रयास जारी

जिला प्रशासन का कहना है कि फेरी सेवा को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। नई निविदा प्रक्रिया पर फिर से विचार किया जा रहा है, ताकि कोई योग्य एजेंसी सामने आ सके और संचालन शुरू हो सके।अधिकारियों का मानना है कि यदि जल्द कोई संचालक नहीं मिला तो सरकारी स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार किया जा सकता है।

निविदा में रुचि न आने के कारण सवाल

लगातार दो बार निविदा में किसी भी डाकवक्ता के भाग नहीं लेने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संचालन लागत, जोखिम और लाभ के असंतुलन के कारण निजी एजेंसियां इसमें रुचि नहीं दिखा रही हैं।

भविष्य पर अनिश्चितता

फिलहाल मनिहारी–साहिबगंज फेरी सेवा के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। एक ओर जहां प्रशासन इसे बहाल करने की कोशिश में जुटा है, वहीं दूसरी ओर संचालक न मिलने से सेवा शुरू होने में देरी हो रही है। लोगों की नजर अब इस बात पर है कि क्या यह महत्वपूर्ण अंतरराज्यीय सेवा जल्द फिर से शुरू हो पाएगी या इसकी बंदी और लंबी खिंचती जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *