प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131
प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित होता है।
इस दिन साधक व्रत रख लक्ष्मी नारायण जी की भक्ति भाव से पूजा करते हैं। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है।
धार्मिक मत है कि एकादशी व्रत करने से साधक द्वारा जाने-अनजाने में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही मृत्यु उपरांत साधक को उच्च लोक में स्थान मिलता है। आइए, देवशयनी एकादशी के बारे में सबकुछ जानते हैं-
कब मनाई जाती है देवशयनी एकादशी?
हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन देवशयनी एकादशी मनाई जाती है। इस शुभ अवसर पर लक्ष्मी नारायण जी की विशेष पूजा की जाती है।
साथ ही उनके निमित्त एकादशी का व्रत रखा जाता है। सनातन शास्त्रों में निहित है कि आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से भगवान विष्णु क्षीर सागर में विश्राम करने चले जाते हैं।
वहीं, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु जागृत होते हैं। इस दिन देवउठनी एकादशी मनाई जाती है।