ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किए जाने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के बाद वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिली है।
हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया, लेकिन दाम अब तक उन आशंकित स्तरों यानी 200 डॉलर प्रति बैरल तक नहीं पहुंचे, जिनका डर कई विशेषज्ञ जता रहे थे।
इसकी बड़ी वजह खाड़ी देशों और तेल व्यापारियों द्वारा तैयार किए गए वैकल्पिक और गुप्त तेल परिवहन नेटवर्क माने जा रहे हैं।
‘डार्क ट्रांसफर’ से जारी है तेल सप्लाई
समुद्री निगरानी कंपनी टैंकर ट्रैकर के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में मध्य पूर्व में डार्क शिप-टू-शिप ट्रांसफर तेजी से बढ़े हैं।
इन ऑपरेशनों में तेल टैंकर समुद्र में अपने ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर देते हैं और एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल ट्रांसफर करते हैं, ताकि उनकी गतिविधि पर नजर न रखी जा सके।
कंपनी ने कहा कि इस बार केवल ईरानी तेल ही नहीं, बल्कि ईरान के अरब पड़ोसी देशों का तेल भी इसी तरीके से भेजा जा रहा है।
टैंकर ट्रैकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मध्य पूर्व में इस सप्ताहांत बड़ी संख्या में डार्क शिप-टू-शिप ट्रांसफर हुए। यह ईरानी तेल नहीं, बल्कि उसके अरब पड़ोसियों का तेल है। यही वजह है कि तेल की कीमतें अभी 200 डॉलर प्रति बैरल तक नहीं पहुंची हैं।”
होर्मुज संकट के बाद बढ़ी वैकल्पिक रास्तों की अहमियत
संकट की शुरुआत मार्च में हुई थी, जब ईरान ने अमेरिका-इजरायल हमलों और अपने सहयोगी समूहों पर कार्रवाई के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर दिया। इसके बाद अप्रैल में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी।
इस दबाव के बीच क्षेत्रीय देशों और व्यापारियों ने नए रास्ते तलाशने शुरू कर दिए। इराक का उम्म कसर बंदरगाह अब ईरान के लिए एक अहम वैकल्पिक व्यापारिक केंद्र बनकर उभरा है। संयुक्त अरब अमीरात से आने वाला सामान पहले इराक पहुंचाया जा रहा है और वहां से सड़क या जलमार्ग के जरिए ईरान भेजा जा रहा है।
‘घोस्ट शिपमेंट’ से रोज लाखों बैरल तेल की आवाजाही
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिबंधों और नाकेबंदी के बावजूद लाखों बैरल तेल अब भी गुप्त तरीकों से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर रहा है। इन घोस्ट शिपमेंट्स में जहाज अपने ट्रांसपोंडर बंद कर देते हैं और बिना लोकेशन साझा किए सफर करते हैं।
इन्वेस्टमेंट बैंक पाइपर सैंडलर के अनुसार, मई में करीब 9 लाख बैरल प्रतिदिन तेल ऐसे गुप्त मार्गों से भेजा गया, जबकि लगभग 21 लाख बैरल प्रतिदिन तेल उन जहाजों से पहुंचाया गया जिनके बारे में माना जाता है कि उन्होंने ईरान समर्थित नेटवर्क को भुगतान किया।
जेपी मॉर्गन की ग्लोबल कमोडिटी स्ट्रैटेजी प्रमुख नताशा कनेवा ने कहा, “नाकेबंदी और कमर्शियल ट्रैफिक में भारी गिरावट के बावजूद आश्चर्यजनक मात्रा में कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद अब भी होर्मुज से गुजर रहे हैं।”
फिर भी बना हुआ है बड़ा खतरा
हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि बाजार अभी भी संकट की गंभीरता को कम आंक रहा है। दुनिया भर में तेल भंडार लगातार घट रहे हैं और आपातकालीन रिजर्व का इस्तेमाल बढ़ रहा है।
पाइपर सैंडलर का अनुमान है कि आने वाले महीनों में ब्रेंट क्रूड औसतन 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। यानी फिलहाल कीमतों में जो स्थिरता दिख रही है, वह अस्थायी साबित हो सकती है।
अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ा
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने होर्मुज के पास अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराया है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अमेरिका को इस हमले का जवाब देना जरूरी होगा और ईरान को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।