अमेरिकी सरकार गैर-कानूनी तरीके से वसूले गए टैरिफ के रूप में व्यवसायों को अरबों डॉलर लौटा रही है। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की क्लोथिंग कंपनी नाशी को 6 प्रतिशत ब्याज के साथ भारी-भरकम रिफंड मिला।
यह उन हजारों वैश्विक व्यवसायों में से एक है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के लिबरेशन डे के तहत लगाए गए टैरिफ का पैसा वापस पा रहे हैं। अनुमानित 166 अरब डॉलर के कुल रिफंड में से 85 अरब डॉलर से अधिक की राशि कंपनियों को लौटाई जा चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और कानूनी पेच
20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि 1977 का अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता, क्योंकि संविधान के तहत यह अधिकार केवल अमेरिकी कांग्रेस के पास है।
हालांकि, इस फैसले ने राष्ट्रपति की शक्तियों पर अंकुश तो लगाया, लेकिन ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति पूरी तरह समाप्त नहीं हुई। प्रशासन ने तुरंत 10 प्रतिशत का अस्थाई वैश्विक टैरिफ लागू कर दिया और राष्ट्रीय सुरक्षा, अनुचित व्यापार प्रथाओं व जबरन श्रम जैसे अन्य कानूनों का सहारा लेकर नए टैरिफ की नींव रख दी।
अमेरिका पर वित्तीय बोझ टैरिफ वापसी का असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर साफ दिख रहा है। जून 2025 में जहां अमेरिका को 27 अरब डालर का अधिशेष हुआ था, वहीं जून 2026 में यह 120 अरब डॉलर के भारी बजट घाटे में बदल गया। हालांकि 166 अरब डॉलर की वापसी अमेरिका के कुल 2026 के सरकारी बजट के 2% से भी कम है।
व्यवसायों का भारी नुकसान
पैसा वापस मिलने के बावजूद कंपनियां अपनी पुरानी स्थिति में नहीं लौट सकतीं। महीनों तक पूंजी फंसी रहने से कंपनियों की कार्यशील लागत बढ़ गई है। छोटे व्यवसायों को औसतन 3,06,000 डॉलर का अतिरिक्त बोझ सहना पड़ा है। रिफंड केवल आयातक को मिल रहा है, आम उपभोक्ताओं या खुदरा विक्रेताओं तक इसका लाभ पहुंचना बेहद जटिल है।
अनिश्चितता का संकट
अनिश्चितता का गहराता संकट इस पूरी प्रक्रिया का सबसे घातक परिणाम है वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता। अदालत के फैसलों के बावजूद अमेरिकी प्रशासन नए कानूनी रास्तों का उपयोग कर टैरिफ लागू कर रहा है। अदालती प्रक्रियाएं महीनों और सालों चलती हैं, जबकि बाजार तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला खोए हुए ग्राहकों, रद हुए सौदों और वैश्विक व्यापार नियमों में टूटे भरोसे को दोबारा बहाल नहीं कर सकता। टैरिफ तो रिफंड किए जा सकते हैं, लेकिन व्यापारिक अनिश्चितता की भरपाई असंभव है।