मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट के 14 जुलाई के अंतरिम आदेश के बाद अब पूरा मामला केवल ‘निकट स्थान’ की कानूनी व्याख्या तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि उस स्थान की वास्तविक स्थिति भी चर्चा का विषय बन गई है, जहां मस्जिद पक्ष नमाज की व्यवस्था चाहता है।
दरअसल, नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद पक्ष हजरत खिलजी की दरगाह से सटा स्थल चाहता है, लेकिन वहां पहुंचने का प्रमुख मार्ग भोजशाला के मुख्य प्रवेश क्षेत्र से होकर गुजरता है।
यानी दोनों धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए एक ही प्रवेश क्षेत्र का उपयोग होता है। ऐसे में, कानून व्यवस्था के तर्क पर प्रशासन इसके लिए सहमत नहीं हुआ।
गत 17 जुलाई को जारी कलेक्टर के आदेश में भी इसी स्थिति का उल्लेख है। आदेश के अनुसार, मस्जिद पक्ष ने भोजशाला के मुख्य द्वार के दाईं ओर दरगाह से लगे उस स्थान पर नमाज की अनुमति मांगी, जहां पूर्व में वजू किया जाता था।
प्रशासन ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस स्थान पर नमाज की अनुमति देने की स्थिति में दोनों पक्षों के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकासी मार्ग उपलब्ध कराना संभव नहीं होगा।
40 पीर का विकल्प, लेकिन सहमति नहीं जिला प्रशासन कानून व्यवस्था के तर्क पर ही वैकल्पिक स्थल पर जोर दे रहा है।
तीन दिन पहले प्रशासन ने मस्जिद पक्ष के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करके मालीवाड़ा स्थित 40 पीर (मालीवाड़ा) सहित कुछ अन्य स्थानों का प्रस्ताव रखा था। हालांकि मस्जिद पक्ष ने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश में प्रयुक्त ‘निकट स्थान’ की भावना के अनुरूप नहीं बताया।
सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार से पहले सहमति बनाने के लिए एक और बैठक हो सकती है। 29 जुलाई को सुनवाई अब पूरा फोकस 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई पर है।
यदि अदालत नमाज के लिए प्रस्तावित स्थान या अंतरिम व्यवस्था को लेकर कोई नया निर्देश देती है तो प्रशासन के पास उसके अनुरूप व्यवस्था करने के लिए आगामी शुक्रवार यानी 31 जुलाई के लिए केवल दो दिन का समय होगा। जबकि उसके बाद मामले की अंतिम सुनवाई पांच अगस्त को प्रस्तावित है।