कैम्ब्रिज में मंदिर निर्माण की मांग तेज, हिंदू समुदाय ने जमीन के लिए ठोकी दावेदारी; जून में आएगा फैसला…

इंग्लैंड के कैम्ब्रिजशायर के नॉर्थस्टो शहर में रहने वाले करीब 150 भारतीय मूल के हिंदू परिवारों को बड़ा झटका तब लगा, जब उन्हें पता चला कि आसपास 40 मील तक कोई हिंदू मंदिर नहीं है।

इससे हजारों हिंदू परिवारों के पास पूजा-अर्चना के लिए कोई स्थायी स्थान नहीं है।

हिंदू समाज नॉर्थस्टो की परियोजना प्रमुख अपर्णा निगम-सक्सेना ने बताया कि यहां आने के बाद उन्हें इस बात का अहसास हुआ कि पूरे कैम्ब्रिजशायर में कोई मंदिर नहीं है। शुरुआत में लोग त्योहार मनाने के लिए एक-दूसरे के घरों या बगीचों में जुटते थे, लेकिन अब उन्हें जगह किराए पर लेनी पड़ती है, जहां कई बार हिंदू रीति-रिवाजों की अनुमति नहीं मिलती।

उन्होंने कहा कि कई पीढ़ियां बिना पूजा स्थल और अपनी संस्कृति से जुड़ाव के बड़ी हो रही हैं। कुछ बुजुर्गों की इच्छा है कि वे अपने जीवन में यहां एक मंदिर देख सकें। साथ ही, स्थानीय स्कूलों के बच्चे चर्च और मस्जिद तो देखते हैं, लेकिन मंदिर नहीं देख पाते।

जमीन के लिए दो प्रस्ताव आमने-सामने

नॉर्थस्टो में एक 0.25 हेक्टेयर जमीन, जो एक झील के पास स्थित है, को धार्मिक या सामुदायिक उपयोग के लिए परिषद को सौंपा जा रहा है। परिषद इस जमीन को 999 साल की लीज पर बहुत कम किराए पर किसी एक समूह को देगी।

इस जमीन के लिए दो प्रस्ताव आए हैं। एक प्रस्ताव हिंदू समाज नॉर्थस्टो का है, जबकि दूसरा नॉर्थस्टो चर्च नेटवर्क और नॉर्थस्टो मुस्लिम समुदाय का संयुक्त प्रस्ताव है। चर्च के प्रस्ताव में एक चर्च, मुस्लिमों के लिए नमाज का हॉल, इस्लामिक कक्षाएं, कैफे और सामुदायिक स्थान बनाने की योजना है।

वहीं हिंदू समाज नॉर्थस्टो ने 79% क्षेत्र में इंटरफेथ सामुदायिक और वेलबीइंग सेंटर बनाने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें किचन, कैफे, STEM, कोडिंग और योग कक्षाएं शामिल होंगी। इसके अलावा 21% हिस्से में हिंदू मंदिर बनाया जाएगा।

मूल्यांकन पर उठे सवाल

अपर्णा निगम-सक्सेना ने परिषद के मूल्यांकन पर असंतोष जताया है। उनका कहना है कि अधिकारियों ने उनके प्रस्ताव को सही तरीके से नहीं समझा। उन्हें वित्तीय अनुभव की कमी और व्यापक समुदाय से जुड़ाव न होने के आधार पर आलोचना का सामना करना पड़ा, जबकि एक नई संस्था के लिए यह स्वाभाविक है।

हालांकि भविष्य में तीन और जमीनों पर बोली लगेगी, लेकिन हिंदू समुदाय इस खास जमीन को ही प्राथमिकता दे रहा है, क्योंकि यह झील के पास स्थित है और इसे शुभ माना जाता है। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह परियोजना बेहद जरूरी है, क्योंकि यहां परिवारों का सहारा कम होता है और ऐसे में पूजा स्थल का होना महत्वपूर्ण है।

जून में होगा फैसला

नॉर्थस्टो चर्च नेटवर्क की प्रतिनिधि बेथ कोप ने कहा कि उनके प्रस्ताव में बहुउद्देश्यीय स्थान होंगे, जिनका उपयोग हिंदू समुदाय भी पूजा के लिए कर सकता है। उन्होंने कहा कि दोनों संगठन परिषद के इस अवसर का सकारात्मक तरीके से जवाब दे रहे हैं।

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