पाकिस्तान की बदहाल अर्थव्यवस्था अब उस भयावह मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां गरीबों के लिए अपने परिजनों को दफनाना तक मुश्किल हो गया है।
आसमान छूती महंगाई ने हालात इतने खराब कर दिए हैं कि अंतिम संस्कार और कब्र की व्यवस्था भी अब आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रावलपिंडी में दशकों पुरानी वह परंपरा लगभग खत्म हो चुकी है, जिसमें लोग सेवा भाव से मुफ्त में कब्र खोदते थे।
अब कब्रिस्तान भी कमाई का जरिया बन गए हैं। कब्र की जगह, खुदाई और ईंटों की तैयारी के लिए लोगों से 40 से 45 हजार पाकिस्तानी रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
कब्रिस्तानों में जगह खत्म हो चुकी है
हालत यह है कि शहर के कई बड़े कब्रिस्तानों में जगह खत्म हो चुकी है। जगह-जगह बोर्ड लगाए जा रहे हैं कि अब दफनाने के लिए कोई प्लाट खाली नहीं बचा। गरीब परिवार अपनों को दफनाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
महंगाई ने कफन तक को महंगा बना दिया है। जो कफन पहले मामूली रकम में आ जाता था, उसकी कीमत अब तीन हजार से चार हजार पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गई है।
व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक
सबसे शर्मनाक बात यह सामने आई है कि कुछ कब्रिस्तान कर्मियों पर पुराने कब्र हटाकर पैसे लेकर नई दफन की जगह देने के आरोप लगे हैं। यानी पाकिस्तान में अब इंसान की मौत के बाद उसकी कब्र भी सुरक्षित नहीं रह गई है।
पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक कंगाली, भ्रष्टाचार, आतंकवाद और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। लेकिन अब हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोगों के लिए जीना ही नहीं, मरना भी महंगा पड़ रहा है।