दंतेवाड़ा : दन्तेवाड़ा में निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर का हुआ शुभारंभ…

अब बस्तर के प्रत्येक गांव को आईईडी के खतरे से पूरी तरह मुक्त करना हमारा संकल्प-उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा

देश के गृह मंत्री श्री अमित शाह और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की वर्चुअल मौजूदगी में दन्तेवाड़ा में आयोजित निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर का हुआ शुभारंभ अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने बस्तर के माओवाद पीडि़तों की मार्मिक कहानियां साझा करते हुए कहा कि आईईडी किसी को नहीं पहचानता था।

नक्सल हिंसा ने बस्तर के निर्दोष लोगों को ऐसी पीड़ा दी, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। इतनी पीड़ा और कठिन परिस्थितियों के बावजूद बस्तर की जनता के मन में नक्सलवाद से मुक्ति का दृढ़ संकल्प था। उसी संकल्प का परिणाम है कि आज बस्तर नक्सलवाद से मुक्त हुआ है। आज इस शिविर में ऐसे 24 आईईडी पीडि़तों को कृत्रिम हाथ-पैर, कैलिपर्स, श्रवण यंत्र, ट्राइसिकल सहित विभिन्न सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि वे फिर से आत्मनिर्भर होकर सम्मानपूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर सकें।

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने आज निर्देश दिए हैं कि यह कार्य यहीं नहीं रुकना चाहिए। मैं और मेरे साथ बस्तर के सभी जनप्रतिनिधि यह संकल्प लेते हैं कि जब भी आवश्यकता होगी, हम पीडि़तों की सहायता के लिए आगे आएंगे। बस्तर के लोगों की सेवा और उनके पुनर्वास का यह संकल्प अनवरत जारी रहेगा। बस्तर की जनता ने जिस विश्वास और संकल्प के साथ नक्सलवाद से मुक्ति का सपना देखा था, उसे पूर्णता तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने बस्तर तिरंगा यात्रा के दौरान नक्सल प्रभावित गांवों में अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब मैं गांवों में जाता था, तब ग्रामीण अपने साथ हुई हृदयविदारक घटनाओं के बारे में बताते थे। बस्तर में शायद ही कोई ऐसा गांव होगा, जहां नक्सल हिंसा से पीडि़त लोगों की कोई कहानी न हो। वर्षों तक नक्सलियों के भय के कारण ये पीड़ाएं गांवों के भीतर ही दबी रहीं। लोग अपनी आपबीती किसी को बता नहीं पाते थे। यहां तक कि वे अपने साथ हुए अत्याचारों की एफआईआर भी दर्ज नहीं करा सके। आज भय का वह वातावरण समाप्त हो रहा है और वर्षों से दबी हुई पीडि़तों की कहानियां सामने आ रही हैं।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर से नक्सलवाद के समापन का सबसे बड़ा श्रेय यहां की जनता को जाता है। बस्तर के लोगों ने अदम्य साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि हमारी पौराणिक परंपराओं में भी बस्तर के लोगों के साहस और सहयोग का उल्लेख मिलता है। रावण जैसे आततायी की सेना को परास्त करने के लिए भगवान श्रीराम का साथ देने वालों में हमारे बस्तर के लोग अग्रणी थे। उसी प्रकार आज बस्तर की जनता की इच्छा, साहस और संकल्प से नक्सलवाद का अंत संभव हुआ है।

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि अब हमारा अगला संकल्प बस्तर के प्रत्येक गांव को आईईडी के खतरे से पूरी तरह मुक्त करना है। इसके लिए ग्राम पंचायतों को आगे आना होगा। प्रत्येक ग्राम पंचायत अपने गांव की सीमा के भीतर पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ समन्वय स्थापित कर सुरक्षित तरीके से चप्पे-चप्पे की जांच सुनिश्चित कराए, ताकि कहीं भी छिपाकर रखे गए आईईडी का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय किया जा सके।

उन्होंने कहा कि नक्सलवाद से मुक्ति के बाद अब बस्तर को आईईडी के भय से भी मुक्त करना आवश्यक है। हमारी कोशिश होनी चाहिए कि बस्तर का कोई बच्चा खेलते हुए, कोई किसान अपने खेत में काम करते हुए और कोई ग्रामीण अपने दैनिक जीवन में आईईडी विस्फोट का शिकार न हो।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार बस्तर की जनता के संकल्प से नक्सलवाद का अंत हुआ है, उसी प्रकार जनभागीदारी, ग्राम पंचायतों के सहयोग और सुरक्षा बलों के समन्वित प्रयासों से हम बस्तर के प्रत्येक गांव को आईईडी मुक्त बनाएंगे। बस्तर के लोगों ने सुरक्षित और भयमुक्त जीवन का जो संकल्प लिया है, उसे पूरा करने के लिए हम पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते रहेंगे।

 इस मौके पर बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप ने दंतेवाड़ा के कारली में आयोजित दिव्यांग सहायता शिविर को बस्तर के नक्सल प्रभावित और हिंसा से पीडि़त लोगों के जीवन में नई आशा का संचार करने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि बस्तर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरती ने हमेशा संघर्ष, साधना और विजय का संदेश दिया है। आज नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों को सहायता, सम्मान और बेहतर जीवन के अवसर उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता है।

      उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों तक नक्सल हिंसा ने बस्तर के जनजीवन को गहरे रूप से प्रभावित किया। जल, जंगल और जमीन के नारों की आड़ में फैली हिंसा के कारण हजारों आम नागरिकों तथा बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों के जवानों को अपनी जान गंवानी पड़ी। अनेक परिवारों का जीवन प्रभावित हुआ और कई लोग शारीरिक रूप से दिव्यांग हो गए। ऐसे में दिव्यांग सहायता शिविर केवल उपकरण वितरण का माध्यम नहीं, बल्कि पीडि़तों के जीवन में आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और सम्मान लौटाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
             बस्तर सांसद श्री कश्यप ने विश्वास व्यक्त किया कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं, पुनर्वास संबंधी प्रयासों और समाज की सहभागिता से बस्तर के प्रभावित परिवारों को नई उम्मीद मिलेगी तथा क्षेत्र शांति, समृद्धि और विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ेगा।

इस दौरान विधायक श्री चैतराम अटामी ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर अंचल नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त होकर विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर सहित पूरे बस्तर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास का वातावरण निर्मित हो रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके अनुरूप नक्सलवाद के विरुद्ध प्रभावी प्रयास किए गए हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत में कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव ने कहा कि दिव्यांगजनों को आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराकर उनके जीवन को सुगम, सरल और आत्मनिर्भर बनाना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से दंतेवाड़ा के पुलिस लाइन कारली मं  विशाल निःशुल्क दिव्यांग सहायता शिविर का आयोजन किया जा रहा है।
      कलेक्टर श्री ध्रुव ने बताया कि शिविर के लिए लगभग एक हजार लोगों को चिन्हित किया गया था, जिनमें से 768 लोगों का पंजीयन किया गया है। पंजीकृत हितग्राहियों में दंतेवाड़ा जिले से 509, बीजापुर से 97 और सुकमा जिले से 62 लोग शामिल हैं। शिविर में दिव्यांगजनों को ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, वॉकर, छड़ी, बैसाखी, श्रवण यंत्र, कृत्रिम हाथ-पैर तथा दृष्टिबाधितजनों के लिए चश्मे सहित विभिन्न उपयोगी उपकरण निःशुल्क प्रदान किए जा रहे हैं।
              कलेक्टर श्री ध्रुव ने बताया कि यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत तथा शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर मां दंतेश्वरी के आशीर्वाद से सेवा और जनकल्याण की भावना को साकार करने का प्रयास है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जाए। इस मौके पर अतिथियों ने गोगुंडा सुकमा के दिव्यांगजन मुचाकी देवा को कृत्रिम पैर लगाकर उनका उत्साहवर्धन किया, तो मुचाकी ने मंच से स्वयं चलकर नीचे उतर इसे अपने जीवन के लिए स्मरणीय निरूपित किया। इस दौरान क्षेत्र के अन्य जनप्रतिनिधिगण समेत कमिश्नर बस्तर श्री डोमन सिंह, आईजी बस्तर श्री बीएन मीणा, पुलिस अधीक्षक श्री चन्द्रमोहन सिंह, जिला पंचायत सीईओ श्री एम भार्गव तथा भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर और एनएसई फाउंडेशन एवं भारतीय जैन संघटना के पदाधिकारी सहित जिला प्रशासन के अधिकारी और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।  

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