पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बजाय और गहराता जा रहा है। इजरायल-हमास संघर्ष, लेबनान में हिजबुल्लाह के साथ जारी झड़पें, ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल की टकराहट और क्षेत्रीय अस्थिरता ने पूरे इलाके को अशांत बना रखा है।
इन घटनाक्रमों से भारत की चिंता लगातार बढ़ रही है, क्योंकि क्षेत्र में भारतीय नागरिकों की बड़ी संख्या, ऊर्जा आयात और आर्थिक हित जुड़े हुए हैं। भारत ने बार-बार संयम और कूटनीतिक समाधान की अपील की है, लेकिन ताजा हमलों ने शांति की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
गाजा में इजरायल का हमला
इजरायल ने गाजा में हमास की सैन्य शाखा के प्रमुख मोहम्मद ओदेह को निशाना बनाकर हमला किया है, जिसके दूरगारामी असर होने की बात विशेषज्ञ कर रहे हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने इसकी जानकारी देते हुए कहा है कि, “हमने अब गाजा में हमास की सैन्य शाखा के नेता और 7 अक्टूबर नरसंहार के मुख्य आर्किटेक्ट मोहम्मद दीफ को मारा है। हम उन सब तक पहुंचेंगे।”
इस हमले को इजरायल ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी दृढ़ता का प्रतीक बताया है, लेकिन इससे गाजा में नागरिकों की मौतें बढ़ने और मानवीय संकट गहराने की आशंका है। हमास ने इसे शांति वार्ता को बाधित करने वाली कार्रवाई करार दिया है।
मंगलवार को इजरायल के पूरे उत्तरी क्षेत्र में कई बार सायरन बजे। लेबनान से हिजबुल्लाह के रॉकेट और ड्रोन हमलों के जवाब में इजरायली सेना ने सतर्कता बढ़ा दी है। सूचना है कि इजरायल ने लेबनान में ‘येलो लाइन’ के पार अपनी जमीनी कार्रवाई तेज कर दी है और सैकड़ों ठिकानों पर हमले किए हैं।
अब तक 3200 लोगों की मौत
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, मार्च से अब तक 3200 से अधिक लोग मारे गए हैं। हिजबुल्लाह की तरफ से भी इजरायली बलों पर हमले जारी है, जिससे सीमा पर तनाव चरम पर है। दो दिन पहले (सोमवार को) अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी हिस्से में मिसाइल साइटों और माइन्स बिछाने वाले जहाजों पर हमले किए।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकाम) ने इसे आत्मरक्षङा में की गई कार्रवाई बताया और कहा कि यह अपने सैनिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी था। ईरान ने इसे युद्धविराम का उल्लंघन करार दिया और जवाबी कार्रवाई की धमकी दी। हालांकि, दोनों पक्ष अभी भी युद्धविराम को बरकरार रखने का दावा कर रहे हैं।
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ दिन पहले कहा था कि ईरान के साथ समझौता काफी हद तक पूरी हो चुकी है लेकिन अंतिम रूप देने में समय लग सकता है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि डील ‘कुछ दिनों’ में हो सकती है, लेकिन कोई जल्दबाजी नहीं है।
प्रस्तावित समझौते में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंकुश और प्रतिबंधों में कुछ राहत शामिल हो सकती है। ईरान ने प्रगति स्वीकार की, लेकिन कहा कि डील ‘इमिनेंट’ नहीं है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि या तो ‘ग्रेट डील’ होगी या कोई डील नहीं।
पश्चिम एशिया में कई मोर्चों पर एक साथ तनाव है। गाजा में हमास के खिलाफ इजरायली अभियान जारी है, जहां ओदेह जैसे नेताओं को मार गिराना इजरायल की रणनीति का हिस्सा है, लेकिन इससे नागरिक हताहत बढ़ रहे हैं और युद्धविराम की कोशिशें बाधित हो रही हैं।
ईरान पर अमेरिकी हमले
लेबनान में हिजबुल्लाह के साथ संघर्ष ने सीमा पार कार्रवाई को बढ़ावा दिया है, जो ईरान समर्थित गुटों की क्षमता को कमजोर करने का प्रयास लगता है। ईरान पर अमेरिकी हमले ने क्षेत्रीय युद्ध की आशंकाओं को नया रूप दिया, हालांकि दोनों पक्ष कूटनीति पर जोर दे रहे हैं। इस पूरे संकट का वैश्विक प्रभाव गंभीर है तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, नौवहन प्रभावित हो रहा है और मानवीय संकट गहरा रहा है।
भारत, जो ईरान, इजरायल, यूएई और सऊदी अरब के साथ संतुलित संबंध रखता है, क्षेत्रीय स्थिरता चाहता है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बार-बार संवाद और संयम की वकालत की है। ब्रिक्स जैसे मंचों पर भी भारत ने चिंता जताई है।
साफ है कि पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की कोशिशें अभी दूर नजर आ रही हैं। अमेरिका-ईरान बातचीत सकारात्मक संकेत दे रही है, लेकिन विश्वास की कमी और क्षेत्रीय गुटों की सक्रियता चुनौती बनी हुई है।