अमेरिका में रह रहे लाखों भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और अमेरिकन ड्रीम का सपना देख रहे टेक दिग्गजों के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर है।
अमेरिकी संसद में एक नया आव्रजन (इमिग्रेशन) विधेयक पेश किया गया है। इस नए बिल के तहत अगर कानून बना तो H-1B वीजा से ग्रीन कार्ड (स्थायी निवास) पाने का पारंपरिक रास्ता हमेशा के लिए बंद हो सकता है।
रिपब्लिकन सांसद चिप रॉय द्वारा पेश किए गए ‘अमेरिकन व्हाइट-कॉलर वर्कर जॉब्स एक्ट ऑफ 2026’ नामक इस बिल में H-1B वीज़ा की अवधि को भी 6 साल से घटाकर महज 2 साल करने और वीज़ा धारकों के वेतन के नियमों को बेहद कड़ा करने का प्रस्ताव रखा गया है।
यह बिल भारतीय आईटी पेशेवरों और अमेरिका में काम कर रहे हजारों विदेशी कर्मचारियों के लिए बड़ी चिंता का कारण बन सकता है।
ग्रीन कार्ड का रास्ता लगभग बंद करने का प्रस्ताव
इस बिल का सबसे विवादित प्रावधान H-1B वीजा के डुअल इंटेंट नियम को समाप्त करना है। अभी तक H-1B वीजe धारक अमेरिका में नौकरी करते हुए ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसे ही डुअल इंटेंट कहा जाता है।
नए प्रस्ताव के अनुसार, H-1B आवेदकों को यह साबित करना होगा कि उनका स्थायी निवास अमेरिका के बाहर है और वे उसे छोड़ने का इरादा नहीं रखते। इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह प्रावधान लागू हुआ, तो H-1B से ग्रीन कार्ड पाने का पारंपरिक रास्ता लगभग असंभव हो जाएगा।
H-1B कर्मचारियों के लिए सख्त नियम
- H-1B कर्मचारियों को 75वें प्रतिशत (75th percentile) के अनुसार उच्च वेतन देना होगा।
- कंपनियों को पहले यह साबित करना होगा कि योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं।
- नौकरी के विज्ञापन सरकारी प्लेटफॉर्म पर डालने होंगे।
- यदि कोई अमेरिकी उम्मीदवार समान या बेहतर योग्य है, तो उसे प्राथमिकता देनी होगी।
- किसी कंपनी में गैर-आप्रवासी कर्मचारियों की संख्या कुल कार्यबल के 5% से अधिक नहीं हो सकेगी।
- H-1B आवेदन से एक वर्ष पहले तक संबंधित पदों पर अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी नहीं की जा सकेगी।
भारतीयों पर सबसे अधिक असर
भारत H-1B वीजा का सबसे बड़ा लाभार्थी देश है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में लगभग 4 लाख नए H-1B वीजा स्वीकृत हुए, जिनमें से करीब 2.83 लाख भारतीय नागरिकों को मिले। यह कुल स्वीकृत वीजा का लगभग 71% है।
इसके अलावा, रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड श्रेणियों में 12.6 लाख से अधिक भारतीय, अपने परिवारों सहित, प्रतीक्षा सूची में हैं। ऐसे में यह बिल लागू होने पर हजारों भारतीयों के अमेरिकन ड्रीम को बड़ा झटका लग सकता है। हालांकि, अमेरिका में इमिग्रेशन नीति को लेकर रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के बीच गहरे मतभेद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बिल को संसद से पारित कराने की राह आसान नहीं होगी।