पैकेटबंद खाद्य और पेय पदार्थों में चीनी, नमक या फैट की मात्रा ज्यादा है तो इसकी जानकारी उपभोक्ताओं को पैकेट के सामने ही साफ-साफ मिलनी चाहिए।
लोकल सर्कल्स के एक सर्वे में बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने कहा कि किसी उत्पाद में इनमें से एक भी चीज तय सीमा से ज्यादा हो तो उस पर स्पष्ट चेतावनी होनी चाहिए।
उपभोक्ताओं ने यह भी कहा कि इसके लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के प्रस्तावित नियमों के दूसरे चरण का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए।
एफएसएसएआइ ने 28 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में एक प्रस्ताव पेश किया था। इसमें पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के सामने वाले हिस्से पर मिलाई गई चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट की अधिक मात्रा होने पर तस्वीर के जरिए चेतावनी देने का प्रस्ताव है।
प्रस्ताव के तहत पैकेट पर लाल रंग के हेक्सागोनल आकार के निशान में ‘ज्यादा चीनी’, ‘ज्यादा नमक’, ‘ज्यादा फैट’ या ‘बहुत ज्यादा मीठा पेय’ जैसी चेतावनी दी जाएगी। इसे दो चरणों में लागू करने का प्रस्ताव है।
पहले चरण में चेतावनी उन उत्पादों पर लागू होगी, जिनमें मिलाई गई चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट में से कम से कम दो चीजें तय सीमा से ज्यादा हों। कुछ मीठे पेय भी इसके दायरे में आएंगे।
वहीं, अगर किसी उत्पाद में इन तीन में से सिर्फ एक चीज ज्यादा है, तो प्रस्ताव के दूसरे चरण तक उस पर चेतावनी लेबल नहीं लगाने की बात कही गई है।
उपभोक्ता चाहते हैं हर ज्यादा मात्रा की जानकारीसर्वे में शामिल ज्यादातर उपभोक्ताओं ने इस व्यवस्था से असहमति जताई। उनका कहना था कि किसी उत्पाद में सिर्फ चीनी, नमक या फैट में से एक की मात्रा भी ज्यादा है तो इसकी जानकारी पैकेट पर साफ तौर पर दी जानी चाहिए। इसे नियम के दूसरे चरण तक टालना नहीं चाहिए।