बांग्लादेश की सरकार ने गाइबंदा जिले के पलाशबाड़ी उपजिला में श्री श्री राधा गोविंद और काली मंदिर में भगवान राम की दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा के निर्माण को निलंबित करने का आदेश दिया है।
कट्टरपंथी इस्लामिक समूहों के दबाव में लिए गए इस फैसले से हिंदुओं में रोष है। काले पत्थर से बनाई जा रही इस विशाल प्रतिमा की लागत भारतीय मुद्रा में 17 करोड़ रुपये है। इस परियोजना पर खर्च होने वाले 22 करोड़ रुपये श्रद्धालुओं ने दान में दिए हैं।
मंदिर के सलाहकार श्यामल कुमार महंत ने मंदिर के आडिटोरियम में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस निर्णय ने तीव्र प्रतिक्रियाएं उत्पन्न की हैं, जिसमें आलोचकों का आरोप है कि यह निलंबन उन इस्लामिक समूहों के दबाव में आया है जो इस परियोजना के खिलाफ हैं।
बांग्लादेश सरकार ने दिए निर्माण कार्य रोकने के आदेश
गाइबंदा जिले में स्थित हुसैनपुर के रामचंद्रपुर गांव में स्थित इस धार्मिक परिसर में कुल 144 देवी-देवताओं की भव्य प्रतिमाएं स्थापित करने की योजना है। इसमें भगवान कृष्ण की 50 फीट ऊंचे विशाल विग्रह का अनावरण विगत 25 नवंबर, 2025 को ही किया जा चुका है।
इसी परिसर में शिव की विशाल प्रतिमा की भी स्थापना होनी है। लेकिन कट्टरपंथियों के विरोध-प्रदर्शनों के बाद यह सारा काम बांग्लादेशी सरकार ने रुकवा दिया है।
निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन ने राम मंदिर के निर्माण के खिलाफ चारों ओर से धमकियों, भड़काने और शत्रुतापूर्ण बयानबाजी की कड़ी निंदा की।
नसरीन ने एक्स पर कहा, ‘बांग्लादेश में कई लाख मस्जिदें हैं और देश भर में नई मस्जिदें बनती जा रही हैं। तो भगवान राम की प्रतिमा के निर्माण के खिलाफ इतना विरोध क्यों है?’
नसरीन ने कहा, ‘पलाशबाड़ी में हिंदू मंदिरों पर हमलों और मूर्तियों के अपमान का इतिहास देखते हुए स्थिति चिंताजनक है। इसने अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को असुरक्षित महसूस कराया। कई इस्लामी देश जैसे-इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), मलेशिया और ओमान में विशाल हिंदू मंदिर हैं। फिर, बांग्लादेश में एक ही मंदिर के निर्माण को कुछ मुसलमान अस्तित्व के संकट के रूप में क्यों पेश कर रहे हैं?’
बांग्लादेशी ब्लिट्ज के संपादक सालेह उद्दीन शोएब चौधरी ने इस्लामिक समूहों के दबाव में मंदिर के निर्माण को रोकने पर गंभीर चिंता जताई है।