फर्जी प्रविष्टि करके श्रेणी बदलते हुए भूमि आवंटन करने के प्रकरण में हुई कार्रवाई के बाद अब चकबंदी विभाग ने भी कार्य में तेजी शुरू कर दी है, जिसमें गुन्नौर तहसील की ग्राम पंचायत असदपुर के गांव दिल्लीपुर सुखेला में करीब 19 वर्ष से चली आ रही चकबंदी प्रक्रिया अब अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है।
फर्जी पट्टा आवंटन प्रकरण को लेकर चर्चा में आए इस गांव में चकबंदी विभाग धारा 52 की कार्रवाई पूरी कर गांव का राजस्व रिकॉर्ड तहसील प्रशासन को सौंपने की तैयारी में जुटा है।
इससे पहले विभाग गांव की सरकारी भूमि, तालाब, चारागाह और अन्य आरक्षित भूमि का नए सिरे से सत्यापन करा रहा है। वर्तमान अभिलेखों का मौके की स्थिति से मिलान किया जा रहा है, वहीं यह भी जांच की जा रही है कि कहीं किसी व्यक्ति को नियमों के विपरीत लाभ तो नहीं दिया गया, किसी के नाम पर दोहरा रकबा तो दर्ज नहीं है या अभिलेखों में जानबूझकर कोई त्रुटि तो नहीं की गई। विभाग राजस्व अभिलेखों की प्रत्येक प्रविष्टि का बारीकी से परीक्षण कर रहा है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न रहे।
धारा 52 की कार्रवाई अंतिम चरण में, सरकारी भूमि
बता दें कि इस गांव में वर्ष 2007 में चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुई थी। गांव में पड़ताल के बाद जमीन की कीमत लगाई गई थी और उसी के आधार पर चक प्रविष्ट किए गए थे और आगे की प्रक्रिया सहायक चकबंदी अधिकारी, चकबंदी अधिकारी, बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी और उपसंचालक चकबंदी के न्यायालय से गुजरती हुई अब तक संपन्न नहीं हो सकी। वर्ष 2018 में चकबंदी के अभिलेख गायब हो जाने के बाद उन्हें दोबारा तैयार कराया गया था। अब उन्हीं अभिलेखों का भी फिर से सत्यापन किया जा रहा है।
अभिलेखों की त्रुटियों और नियमों के विपरीत मिले लाभ की हो रही बारीकी से जांच
दूसरी ओर गांव में 162 फर्जी पट्टा आवंटन प्रकरण की पुलिस जांच पहले से चल रही है। ऐसे में चकबंदी विभाग भी अंतिम दस्तावेज तैयार करने से पहले प्रत्येक रिकार्ड को गहनता से परख रहा है, जिससे सरकारी भूमि से जुड़ी किसी भी अनियमितता, गलत प्रविष्टि अथवा नियमों के विपरीत दिए गए लाभ की पहचान कर उसका निस्तारण किया जा सके। विभाग का प्रयास है कि सभी अभिलेख पूरी तरह त्रुटिरहित होने के बाद ही धारा 52 की कार्रवाई पूर्ण की जाए और गांव का संपूर्ण रिकार्ड तहसील प्रशासन को हस्तांतरित किया जाए।
तीसरे दिन नहीं हो सकी फर्जी आवंटन प्रकरण मे सुनवाई
फर्जी भूमि आवंटन के मामले में फिलहाल यह मामला जिला मजिस्ट्रेट के न्यायालय में चल रहा है। आठ जुलाई और नौ जुलाई को इस प्रकरण में डीएम अंकित खंडेलवाल द्वारा सुनवाई की गई। पहले दिन 80 पट्टों को लेकर सुनवाई की गई दूसरे दिन 20 पट्टों धारकों को लेकर सुनवाई की गई।
तीसरे दिन भी तिथि निर्धारित थी लेकिन तीसरे दिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। अब सोमवार को सुनवाई होगी। संभावना जताई जा रही है कि किसानों का पक्ष लेने के बाद फर्जी रूप से किए गए। इन सभी आवंटन को निरस्त किया जाएगा।
भूमि आवंटन की सभी पत्रावलियां खंगालेंगे एसडीएम और तहसीलदार
मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह के निर्देश पर जनपद में पिछले कुछ वर्षों के दौरान हुए भूमि आवंटनों की व्यापक जांच शुरू कर दी गई है। तहसील गुन्नौर के गांव दिल्लीपुर सुखेला में सामने आए फर्जी आवंटन प्रकरण के बाद यह कार्रवाई और तेज हो गई है। संभल प्रशासन ने भी पुराने आवंटनों की पत्रावलियां निकलवाकर उनका परीक्षण शुरू करा दिया है।
मंडलायुक्त के निर्देश पर पुराने आवंटनों की जांच शुरू
एडीएम सत्यप्रिय सिंह ने बताया कि जनपद के सभी एसडीएम और तहसीलदार को आवंटन से संबंधित सभी अभिलेखों और पत्रावलियों की बिंदुवार जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में यह देखा जाएगा कि आवंटन नियमानुसार हुआ था या नहीं, कहीं पात्रता की अनदेखी, अभिलेखों में गड़बड़ी या अन्य अनियमितता तो नहीं हुई।
रिपोर्ट के आधार पर फर्जी आवंटन निरस्त कराने की होगी कार्रवाई
प्रत्येक प्रकरण की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित न्यायालय में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जिन आवंटनों में फर्जीवाड़ा या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होगी, उन्हें निरस्त कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि के आवंटन में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होगी।