उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। सबसे बड़े इस राज्य की चुनावी गतिविधियों पर देशभर की निगाहें हैं। इसी गंभीरता के साथ सत्ताधारी भाजपा और मुख्य विपक्षी दल सपा सहित बसपा ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
हर दिन चुनावी गर्माहट बढ़ती जा रही है, लेकिन सपा के साथ गठबंधन में सीटों के बंटवारे में उचित भागीदारी चाह रही कांग्रेस खुद की ही तैयारियों को लेकर गंभीर दिखाई नहीं दे रही।
स्वयं कांग्रेस के प्रदेश के नेता हैरत में हैं कि हाईकमान आखिर संगठन पर ठोस निर्णय क्यों नहीं ले पा रहा? क्यों संगठन सृजन अभियान के तहत बने जिला से मंडल तक के अध्यक्षों को पुन: समीक्षा के नाम पर ‘होल्ड’ पर डाल दिया गया है और क्यों प्रदेश कार्यकारिणी का गठन नहीं किया जा रहा?
यूपी चुनाव को लेकर गंभीर नहीं है कांग्रेस
कांग्रेस नेतृत्व ने देशभर में संगठन सृजन अभियान के तहत नए सिरे से संगठन तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया तो उत्तर प्रदेश के कार्यकर्ता आश्वस्त हुए कि अब शायद कुछ स्थिति सुधरेगी।
संगठन सृजन अभियान के तहत ही कार्यकर्ताओं के साक्षात्कार हुए, जिलों से फीडबैक लिए गए और अंतत: दावा किया गया कि जिला से लेकर मंडल तक पार्टी ने अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी है, अब जिला और मंडल कमेटियों का गठन ही शेष है।
जिलाध्यक्षों के साथ लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने बैठक कर उन्हें लक्ष्य भी सौंप दिए थे। मगर, उत्तर प्रदेश में कई स्थानों से शिकायत आई कि कुछ जिलाध्यक्षों की नियुक्ति सही नहीं हुई है।
इस पर हाईकमान ने आदेश दे दिया कि राज्य में संगठन की समीक्षा होगी। केंद्रीय पर्यवेक्षक के नाम तय कर दिए गए और कहा गया कि उनकी रिपोर्ट के आधार पर जहां आवश्यकता होगी, वहां जिला और मंडल अध्यक्षों को बदला जाएगा।
प्रदेश कार्यकारिणी का गठन अभी तक नहीं हुआ
इस निर्णय को भी महीनों बीत गए, लेकिन हाईकमान अभी तक उन केंद्रीय पर्यवेक्षकों के जिले आवंटित नहीं कर सका। पार्टी के प्रदेश स्तर के एक नेता ने दावा किया कि जो नए जिला और मंडल अध्यक्ष बने थे, वह असमंजस में हैं कि वह समीक्षा के बाद पद पर रहेंगे या नहीं, इसलिए वह निष्क्रिय हैं। अपेक्षित रूप से संगठन की गतिविधियां नहीं चल रहीं। इसके अलावा प्रदेश कार्यकारिणी का गठन भी नहीं हुआ है। प्रदेश संगठन के नाम पर सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष अजय राय हैं।
वहीं, प्रदेश प्रवक्ता अंशू अवस्थी का कहना है कि केंद्रीय पर्यवेक्षकों के जिले आवंटित तो नहीं हुए हैं, लेकिन संगठन सृजन अभियान के समन्वय के लिए प्रदेश स्तर पर एक कार्यालय बना है।
वहां से चिह्नित किया जा रहा है कि कहां बूथ स्तर तक इकाइयां बन गईं, कहां अधूरी हैं और कहां बिल्कुल नहीं बनीं। काम चल रहा है और जैसे ही केंद्रीय पर्यवेक्षक आ जाएंगे तो वह समीक्षा करेंगे। वह जहां जरूरत समझेंगे, बदलाव की रिपोर्ट हाईकमान को सौंपेंगे।