कांग्रेस बनाम कांग्रेस: थरूर के बयान पर पार्टी के भीतर ही छिड़ी बहस…

कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर जम्मू-कश्मीर के हालातों को लेकर अपने एक बयान के चलते पार्टी के भीतर ही विवादों में घिर गए हैं। घाटी में स्थिति सामान्य होने की दिशा में उत्साहजनक प्रगति का दावा करने पर उन्हें अपनी ही पार्टी के नेताओं की तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

थरूर की उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात

शशि थरूर ने श्रीनगर के लोक भवन में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की थी। इस बैठक के बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने अनुभव साझा किए, “श्रीनगर में! आज लोक भवन में उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा जी के साथ एक शानदार बैठक का सम्मान प्राप्त हुआ। हमने राज्य की स्थिति और सामान्य स्थिति की ओर उत्साहजनक प्रगति पर चर्चा की।

जब मैं वहां पहुंचा, तो वह कश्मीरी लेखक संघ के अध्यक्ष और एक महिला संगठन के साथ बातचीत कर रहे थे। यह एक सकारात्मक जनसंपर्क था जिसका मैंने स्वागत किया। यद्यपि कई चुनौतियां अभी बाकी हैं और बहुत कुछ किया जाना है, लेकिन मैं इस बैठक से लंबे समय बाद बहुत अधिक सकारात्मक भावना के साथ लौटा हूं।”

कांग्रेस पार्टी के भीतर रार

थरूर की इस श्रीनगर यात्रा और उपराज्यपाल के साथ उनकी मुलाकात ने कांग्रेस पार्टी के भीतर भूचाल ला दिया है। उनकी पोस्ट पर प्रतिक्रिया तेज और तीखी थी, जो सीधे पार्टी के भीतर से ही आई।

जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रविंदर शर्मा ने थरूर की इस पोस्ट पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जमीनी हकीकत को समझने के लिए शशि थरूर को कश्मीर घाटी के आम लोगों से मिलने का समय निकालना चाहिए था।

कांग्रेस के लिए थरूर के इस बयान की टाइमिंग बेहद खराब मानी जा रही है। पार्टी लगातार बीजेपी पर जम्मू-कश्मीर का दर्जा घटाकर उसे राज्य से केंद्र शासित प्रदेश बनाने और वहां सामान्य स्थिति बहाल करने में पूरी तरह विफल रहने का आरोप लगाती रही है। ऐसे में थरूर का उत्साहजनक प्रगति की बात स्वीकार करना सीधे तौर पर कांग्रेस के आधिकारिक रुख के खिलाफ जाता है।

बीजेपी ने ली चुटकी

इस अंदरूनी कलह और थरूर के बयान को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साधने में देर नहीं लगाई। बीजेपी के प्रवक्ता अभिजीत जसरोटिया ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा, “इस विडंबना को नजरअंदाज करना मुश्किल है। एक तरफ जहां कांग्रेस केंद्र की कश्मीर नीति पर लगातार हमला कर रही है, वहीं जमीनी आंकड़े एक अलग ही तस्वीर पेश करते हैं।

अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से पत्थरबाजी की घटनाएं लगभग समाप्त हो चुकी हैं। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि पिछले 18 महीनों में एक भी कश्मीरी युवा आतंकी संगठनों में शामिल नहीं हुआ है।”

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